1 इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2025: अफ्रीका की ग्रासा माशेल को अंतरराष्ट्रीय जूरी ने चुना

इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार 2025 की घोषणा कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय जूरी ने इस वर्ष यह प्रतिष्ठित सम्मान अफ्रीका की जानी-मानी राजनेता, समाजसेवी और मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रासा माशेल को देने का फैसला किया है। इस जूरी की अध्यक्षता भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन कर रहे हैं। ग्रासा माशेल का जन्म 17 अक्टूबर 1945 को मोजाम्बिक के एक ग्रामीण इलाके में ग्रासा सिम्बिने के रूप में हुआ था। उन्होंने मेथोडिस्ट मिशन स्कूलों में पढ़ाई की और बाद में जर्मन भाषा का अध्ययन करने के लिए लिस्बन विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति प्राप्त की। वहीं उनके भीतर स्वतंत्रता और राजनीति के प्रति जागरूकता पैदा हुई। 1973 में मोजाम्बिक लौटने के बाद उन्होंने मोजाम्बिक लिबरेशन फ्रंट से जुड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और शिक्षक के रूप में भी काम किया। 1975 में देश को आजादी मिलने के बाद ग्रासा माशेल मोजाम्बिक की पहली शिक्षा और संस्कृति मंत्री बनीं।
2 आईआईसीडीईएम -2026 का संचालन शुरू हुआ

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) का तीन दिवसीय सम्मेलन, लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईआईसीडीईएम) 2026, नई दिल्ली के भारत मंडपम में (21 से 23 जनवरी) शुरू हुआ। विशेष रूप से आयोजित एक स्वागत समारोह में, भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) श्री ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्तों (ईसी) डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर लगभग 60 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया। सम्मेलन का शुभारंभ एक भव्य उद्घाटन सत्र के साथ हुआ, जिसमें 42 चुनाव प्रबंधन निकायों (ईएमबी) के प्रतिनिधियों, 27 देशों के राजदूतों/उच्चायुक्तों, 70 से अधिक राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों और निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और देश भर के 36 मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) सहित लगभग 1,000 लोगों ने भाग लिया। आईआईसीडीईएम -2026 के विषय पर आईआईआईडीईएम के महानिदेशक श्री राकेश वर्मा ने कहा कि भारत की अध्यक्षता का विषय, ‘एक समावेशी, शांतिपूर्ण, लचीली और टिकाऊ दुनिया के लिए लोकतंत्र‘, इस बात की व्यापक और बहुआयामी समझ को दर्शाता है कि 21वीं सदी में लोकतंत्र को क्या प्रदान करना चाहिए।
3 27 वर्षों की उल्लेखनीय सेवा के बाद अंतरिक्ष एजेंसी नासा से सेवानिवृत्त हुईं सुनीता विलियम्स

नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 27 वर्षों की उल्लेखनीय सेवा के बाद अंतरिक्ष एजेंसी से सेवानिवृत्त हो गईं। नासा के एक बयान के मुताबिक, सुनीता विलियम्स 27 दिसंबर, 2025 को एजेंसी से रिटायर हो गई हैं। एक प्रेस विज्ञप्ति में नासा ने बताया कि विलियम्स ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के तीन मिशनों में उड़ान भरी और अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए, जो किसी नासा अंतरिक्ष यात्री के लिए दूसरा सबसे अधिक समय है। उन्होंने नौ स्पेस वॉक पूरे किए, जिनकी कुल अवधि 62 घंटे से अधिक रही, जो महिला श्रेणी में सबसे अधिक समय है। वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली व्यक्ति भी थीं। भारतीय मूल की विलियम्स ने पहली बार 2006 में स्पेस शटल डिस्कवरी से उड़ान भरी और बाद में उन्होंने एक्सपीडिशन 33 के दौरान आईएसएस की कमांडर के रूप में कार्य किया। उनका सबसे हालिया मिशन 2024-2025 में बोइंग स्टारलाइनर और स्पेसएक्स क्रू-9 के साथ था, जहां उन्होंने एक्सपेडिशन 72 की कमान संभाली। अपने करियर के दौरान, विलियम्स ने अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण, रूस में अभियानों और भविष्य के चंद्रयान मिशनों के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को तैयार करने सहित जमीनी स्तर पर नासा में भी योगदान दिया। अमेरिकी नौसेना की सेवानिवृत्त कैप्टन, उनके पास हेलीकॉप्टर और स्थिर-पंख वाले विमानों में 4,000 से अधिक उड़ान घंटों का अनुभव है। बता दें, सुनीता विलियम्स का जन्म यूक्लिड, ओहायो में हुआ था। वह नीडहम, मैसाचुसेट्स को अपना होमटाउन मानती हैं। उनके पिता एक न्यूरोएनाटोमिस्ट हैं, जो गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन में पैदा हुए थे। हालांकि, बाद में वह अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने बोनी पांड्या से शादी की। बोनी स्लोवेनियाई मूल की हैं।

संचार लेखा महानियंत्रक कार्यालय द्वारा विकसित सम्पन्न पेंशन प्रबंधन प्रणाली को उमंग (यूनिफायड मोबाइल एप्लिकेशन फॉरन्यू एज गवर्नेंस) प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया गया है। इस पहल से पेंशनभोगियों को उमंग वेब पोर्टल या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपना पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) नंबर और जीवन प्रमाण पत्र (एलसी) की वैधता स्थिति प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी पेंशनभोगियों को उनकी पेंशन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी हर समय उपलब्ध रहे। संपन्न (सिस्टम फॉर एकाउंटिंग एंड मैनेजमेंट ऑफ पेंशन) विभाग का एक प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो पेंशन प्रशासन और संबद्ध वित्तीय प्रबंधन कार्यों के लिए संचार लेखा महानियंत्रक कार्यालय द्वारा विकसित और संचालित किया जाता है। 29 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित, यह प्रणाली-केंद्रित प्रशासन से पेंशनभोगी-केंद्रित शासन की ओर एक बदलाव का प्रतीक है, जिससे सेवानिवृत्त लोगों और उनके परिवारों को अपने उचित लाभों का दावा करने के लिए कार्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
5 उपराष्ट्रपति ने राम जन्मभूमि आंदोलन पर लिखी गयी पुस्तक का विमोचन किया

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एनक्लेव में पूर्व सचिव श्री सुरेंद्र कुमार पचौरी द्वारा लिखित पुस्तक “अमृत का प्याला: राम जन्मभूमि – चुनौती और प्रतिक्रिया” का विमोचन किया।
6 डीजीसीए ने एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस के लिए इलेक्ट्रॉनिक कार्मिक लाइसेंस सेवा शुरू की

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने यहां डीजीसीए मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस (एटीपीएल) के लिए इलेक्ट्रॉनिक कार्मिक लाइसेंस (ईपीएल) सेवाओं का शुभारंभ किया। डीजीसीए की ओर से ईपीएल एटीपीएल सेवा का उद्घाटन किया गया, जो इसके डिजिटल परिवर्तन की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इलेक्ट्रॉनिक कार्मिक लाइसेंस एक सुरक्षित डिजिटल लाइसेंस है जिसमें प्रामाणिकता सुनिश्चित करने, गड़बड़ी रोकने और त्वरित समय पर सत्यापन सक्षम करने के लिए आईसीएओ के अनुरूप सुरक्षा सुविधाएं शामिल हैं। ईपीएल को ईजीसीए मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए प्राप्त किया जा सकता है। डीजीसीए ने फरवरी 2025 में वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस (सीपीएल) और फ्लाइट रेडियो टेलीफोन ऑपरेटर (प्रतिबंधित) लाइसेंस (एफआरटीओएल) को शुरू करने के साथ ईपीएल की शुरुआत की थी।
7 जापान: फुकुशिमा हादसे के बाद दुनिया का सबसे बड़ा काशिवाज़ाकी-कारीवा परमाणु संयंत्र फिर से चालू हुआ

जापान में फुकुशिमा बिजली संयंत्र में हुई दुर्घटना के लगभग 15 साल बाद दुनिया के सबसे बड़े काशिवाज़ाकी-कारीवा परमाणु संयंत्र का रिएक्टर फिर से चालू कर दिया गया। इससे अगले महीने व्यावसायिक रूप से बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। 2011 से पहले जापान में लगभग 30 प्रतिशत बिजली उत्पादन परमाणु ऊर्जा से होता था और अब 2030 तक इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है।
8 एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 2026 में भारत 6वें नंबर पर

भारत को एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 2026 में छठा स्थान मिला है, जो देश की विनिर्माण क्षमता में हुई प्रगति को दर्शाता है, लेकिन साथ ही प्रतिस्पर्धात्मकता में मौजूद कमियों को भी उजागर करता है। यह रैंकिंग एशिया की प्रमुख विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं की तुलना संरचनात्मक और नीतिगत संकेतकों के आधार पर करती है। एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 2026 में भारत 11 एशियाई देशों में छठे स्थान पर रहा। एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स एक वार्षिक मूल्यांकन है, जिसे हांगकांग स्थित पैन-एशियन सलाहकार संस्था डेज़न शिरा एंड एसोसिएट्स द्वारा जारी किया जाता है। यह सूचकांक एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को आठ प्रमुख स्तंभों—अर्थव्यवस्था, राजनीतिक जोखिम, व्यवसायिक वातावरण, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कर नीति, अवसंरचना, कार्यबल और नवाचार—के आधार पर परखता है। इन स्तंभों को 43 उप-मापदंडों में विभाजित किया गया है, जिससे दीर्घकालिक विनिर्माण क्षमता की गहन और डेटा-आधारित तुलना संभव होती है। चीन ने एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स 2026 में शीर्ष स्थान बनाए रखा, जो उसके विशाल पैमाने, मज़बूत अवसंरचना और एकीकृत आपूर्ति शृंखलाओं को दर्शाता है। मलेशिया पहली बार दूसरे स्थान पर पहुँचा, जबकि वियतनाम तीसरे स्थान पर खिसक गया। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सिंगापुर चौथे स्थान पर रहा और दक्षिण कोरिया पाँचवें स्थान पर आ गया।
9 सीटीआईएल और गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने गांधीनगर में विधि एवं अर्थशास्त्र पर 9 वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया

सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (सीटीआईएल) ने गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) के सहयोग से, जीएनएलयू के ‘सेंटर फॉर लॉ एंड इकोनॉमिक्स‘, ‘सेंटर फॉर एम्पेरिकल एंड एप्लाइड रिसर्च इन लॉ एंड इंटरडिसिप्लिनरी स्टडीज‘ और ‘सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज‘ के माध्यम से, गांधीनगर में ‘9वें अंतर्राष्ट्रीय विधि और अर्थशास्त्र सम्मेलन‘ (शासन और समावेशी सार्वजनिक नीति का अनुभवजन्य और अनुप्रयुक्त विधि और अर्थशास्त्र) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस सम्मेलन में कानून और अर्थशास्त्र के इंटरफेस से जुड़े प्रमुख मुद्दों की जांच की गई, जिसमें नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, चिकित्सकों और उद्योग हितधारकों के दृष्टिकोण से व्यापार नीति की चुनौतियों को शामिल किया गया। इसमें पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र और विशेषज्ञ पूर्ण सत्र आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और भारत के महान्यायवादी, श्री आर. वेंकटरमणी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।