ओडिशा बनाएगा भारत की पहली आदिवासी स्वास्थ्य वेधशाला

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1.जलवायु अनुसंधान वैज्ञानिक ‘सिंथिया रोसेनज़वेग’ को विश्व खाद्य पुरस्कार 2022

हाल ही में विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन ने विश्व खाद्य पुरस्कार 2022 की विजेता संयुक्त राज्य अमेरिका की डॉ सिंथिया रोसेनज़विग के नाम की घोषणा की। रोसेनज़विग को उनके शोध ‘जलवायु और खाद्य प्रणालियों के बीच संबंधों को समझने तथा भविष्य में दोनों कैसे बदलेंगे एवं इसका पूर्वानुमान’ के लिये पुरस्कार हेतु चुना गया। वर्ष 2021 में प्रमुख पोषण विशेषज्ञ डॉ. शकुंतला हरक सिंह थिल्स्टेड ने पुरस्कार जीता और वर्ष 2020 में भारतीय अमेरिकी मृदा वैज्ञानिक डॉ. रतन लाल ने पुरस्कार जीता। विश्व खाद्य पुरस्कार विश्व में भोजन की गुणवत्ता, मात्रा या उपलब्धता में सुधार कर उन्नत मानव विकास करने वाले व्यक्तियों की उपलब्धियों को मान्यता देने हेतु प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मान है।

2.ओडिशा बनाएगा भारत की पहली आदिवासी स्वास्थ्य वेधशाला

एसटी और एससी विकास विभाग ने क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (RMRC), भुवनेश्वर के साथ एक आदिवासी स्वास्थ्य वेधशाला (TriHOb) की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जो ओडिशा में आदिवासी स्वास्थ्य में समानता सुनिश्चित करने के लिए देश में पहली बार है। सूचना विभाग के अनुसार, आदिवासी स्वास्थ्य वेधशाला (TriHOb) “देश में पहली” ऐसी व्यवस्था है, और इसका उद्देश्य एक प्रभावी, साक्ष्य-आधारित और नीति-उन्मुख केंद्र स्थापित करना है। यह राज्य में आदिवासी स्वास्थ्य के संबंध में बीमारी के बोझ, अच्छे स्वास्थ्य वाले व्यवहार और स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली की व्यवस्थित और निरंतर निगरानी करेगा। ‘मो स्कूल (Mo School)’ अभियान की अध्यक्ष सुष्मिता बागची ने इस कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समूहों के बीच एक आदिवासी परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण का भी उद्घाटन किया। यह अध्ययन आगे अनुदैर्ध्य कोहोर्ट अध्ययन और कार्यान्वयन नीति-उन्मुख अनुसंधान की नींव रखेगा। यह अध्ययन स्वास्थ्य कार्यक्रमों और नीतिगत हस्तक्षेपों की पहुंच के बारे में एक विचार प्रदान करेगा और जहां भी आवश्यक हो, पाठ्यक्रम सुधार का सुझाव देगा। ‘मो स्कूल’ (माई स्कूल) कार्यक्रम का उद्देश्य ओडिशा में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के नवीनीकरण में सहयोग करना और योगदान देना है।

3.कपड़ा मंत्रालय ने पीएम मित्र योजना पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया

कपड़ा मंत्रालय ने पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क (पीएम मित्र) योजना पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया है। ‘पीएम मित्र’ पार्क को सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मोड में एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle- SPV) के ज़रिये विकसित किया जाएगा, जिसका स्वामित्व केंद्र और राज्य सरकार के पास होगा। प्रत्येक ‘मित्र’ पार्क में एक इन्क्यूबेशन सेंटर, कॉमन प्रोसेसिंग हाउस और एक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट तथा टेक्सटाइल संबंधी सुविधाएँ जैसे- डिज़ाइन सेंटर एवं टेस्टिंग सेंटर होंगे। यह ‘विशेष प्रयोजन वाहन’/मास्टर डेवलपर न केवल औद्योगिक पार्क का विकास करेगा, बल्कि रियायत अवधि के दौरान इसका रखरखाव भी करेगा। इस योजना के तहत केंद्र सरकार सामान्य बुनियादी अवसंरचना के विकास हेतु प्रत्येक ग्रीनफील्ड ‘मित्र’ पार्क के लिये 500 करोड़ रुपए और प्रत्येक ब्राउनफील्ड पार्क के लिये 200 करोड़ रुपए की विकास पूंजी सहायता प्रदान करेगी। ग्रीनफील्ड का आशय एक पूर्णतः नई परियोजना से है, जिसे शून्य स्तर से शुरू किया जाना है, जबकि ब्राउनफील्ड परियोजना वह है जिस पर काम शुरू किया जा चुका है।

4.इंडो-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स पर आशय की संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए

केन्द्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर.के. सिंह और जर्मनी के आर्थिक मामलों और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रॉबर्ट हैबेक ने इंडो-जर्मन हाइड्रोजन टास्क फोर्स पर आशय की एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए। भारत दुनिया में अक्षय ऊर्जा क्षमताओं के विकास की सबसे तेज दर के साथ ऊर्जा पारगमन में विश्व के अग्रणी देशों में से एक के रूप में उभरा है। उन्होंने अपने जर्मन समकक्ष से कहा कि भारत में हमारे पास एक पारदर्शी बोली प्रणाली, एक खुला बाजार, एक त्वरित विवाद समाधान प्रणाली है और हमें विश्व स्तर पर आरई में निवेश के लिए सबसे आकर्षक स्थलों में से एक के रूप में स्वीकार किया जाता है।

5.सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने तमिलनाडु में ‘एंटरप्राइज़ इंडिया नेशनल कॉयर कॉन्क्लेव 2022’ का उद्घाटन किया

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में ‘एंटरप्राइज़ इंडिया नेशनल कॉयर कॉन्क्लेव 2022‘ का उद्घाटन किया। यह आयोजन कॉयर और कॉयर उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा इनके अनुप्रयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने के लिये राज्य एवं केंद्र सरकारों के बीच एक समन्वित प्रयास के रूप में आयोजित किया जा रहा है। प्राकृतिक रूप से निम्नीकरण योग्य, पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद के रूप में कॉयर के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये 6 मई, 2022 को ‘रन फॉर कॉयर’ का भी आयोजन किया जा रहा है। इस दौड़ में गणमान्य व्यक्तियों, कॉलेज के छात्रों और आम जनता सहित एक हज़ार से अधिक लोगों के भाग लेने की उम्मीद है। कॉयर प्रकृति में नारियल के एक उपोत्पाद के रूप में पाया जाने वाला ‘नारियल पाम’ द्वारा प्रचुर मात्रा में उत्पादित पदार्थ है। यह प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रेशेदार पदार्थ है जो नारियल के खोल के बाहर पाया जाता है जिसे प्राकृतिक रूप से उपयोग के लिये संसाधित किया जाता है। कॉयर का उपयोग सदियों से नाविकों द्वारा रस्सी के रूप में सामान को बाँधने तथा जहाज़ों के केबल्स (Ship Cables) के लिये किया जाता रहा है।

6.हैदराबाद करेगा भारत की पहली अनूठी तरह की फ्लो केमिस्ट्री टेक्नोलॉजी हब की मेज़बानी

तेलंगाना सरकार ने उद्योग भागीदारों के साथ मिलकर डॉ. रेड्डीज इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (DRILS) में एक फ्लो केमिस्ट्री टेक्नोलॉजी हब (FCT Hub) लॉन्च किया गया है। उद्योग और वाणिज्य (I&C) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के प्रधान सचिव, जयेश रंजन ने हब का उद्घाटन करते हुए कहा कि, यह हमारे देश में अपनी तरह का पहला और भारत में फार्मा व्यवसाय के लिए एक प्रवर्तक है।

7.रेलटेल और डब्ल्यूएचओ ने विशाखापत्तनम में मोबाइल कंटेनर अस्पताल का उद्घाटन किया

रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश मेड टेक जोन (AMTZ) के विशाखापत्तनम परिसर में हेल्थ क्लाउड डिजाइन और स्थापित किया था। आंध्र प्रदेश मेड टेक ज़ोन (AMTZ) दुनिया का पहला एकीकृत चिकित्सा उपकरण निर्माण केंद्र है। एएमटीजेड के परिसर में निर्मित हेल्थ क्लाउड का उद्घाटन डब्ल्यूएचओ-जिनेवा के डब्ल्यूएचओ इनोवेशन हब के प्रमुख लुईस एजर्सनैप ने किया है। रेलटेल ने मोबाइल कंटेनर अस्पताल के लिए टेलीकंसल्टेशन समाधान के लिए पूर्ण तकनीकी सहायता भी प्रदान की है, जिसे AMTZ में डिजाइन और निर्मित किया गया है, जिसमें दूरदराज के क्षेत्रों में रेडी-टू-ऑपरेशन के लिए सभी आवश्यक अस्पताल सेट-अप हैं। इसे पहियों पर भी चलाया जा सकता है। यह डिजिटल भुगतान इंटरफेस वाले मोबाइल ऐप के माध्यम से दवाओं को निकालने के लिए एक हेल्थ एटीएम के साथ आता है।

8.टोक्यो ओलंपियन डिस्कस थ्रोअर कमलप्रीत कौर अस्थायी रूप से निलंबित

ओलंपियन डिस्कस थ्रोअर कमलप्रीत कौर को एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (AIU) ने प्रतिबंधित पदार्थ के लिए टेस्ट में पाज़टिव पाये जाने पर अनंतिम रूप से निलंबित कर दिया है। 29 मार्च को कमलप्रीत का टेस्ट किया गया था, उनके नमूने में प्रतिबंधित पदार्थ स्टैनोजोलोल (Stanozolol) पाया गया, जिसके चलते उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इस पदार्थ का सेवन, विश्व एथलेटिक्स डोपिंग रोधी नियमों का उल्लंघन करता है। कौर ने 63.7 मीटर के थ्रो के साथ छठे स्थान पर रहते हुए टोक्यो ओलंपिक फाइनल में जगह बनाई थी।

9.रिद्धिमान साहा मामले में BCCI ने पत्रकार बोरिया मजूमदार पर 2 साल का प्रतिबंध लगाया

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने पत्रकार बोरिया मज़ूमदार को दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। उन्हें आंतरिक जांच में विकेटकीपर रिद्धिमान साहा को धमकी देने और डराने के प्रयास का दोषी पाया गया था। बीसीसीआई की शीर्ष परिषद ने पिछले हफ्ते अपनी बैठक के दौरान तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पर विचार किया और मज़ूमदार को किसी भी क्रिकेट में शामिल होने या दो साल के लिए क्रिकेटरों के साक्षात्कार पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया।

10.सीमा सड़क संगठन का 62वाँ स्थापना दिवस

07 मई, 2022 को सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा अपना 62वाँ स्थापना दिवस मनाया गया। सीमा सड़क संगठन (BRO) की स्थापना 7 मई, 1960 को हुई थी और यह रक्षा मंत्रालय के तहत एक प्रमुख सड़क निर्माण संस्था के रूप में कार्य करता है। ध्यातव्य है कि यह संगठन सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करने में अग्रणी भूमिका अदा कर रहा है। यह पूर्वी एवं पश्चिमी सीमा क्षेत्रों में सड़क निर्माण तथा इसके रख-रखाव का कार्य करता है ताकि सेना की रणनीतिक आवश्यकताएँ पूरी की जा सकें। आज़ादी के पश्चात् के शुरूआती वर्षों में भारत के समक्ष लगभग 15000 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा की सुरक्षा तथा अपर्याप्त सड़क साधन वाले उत्तर व उत्तर-पूर्व के आर्थिक रूप से पिछड़े सुदूरवर्ती इलाके को भविष्य में उन्नत व विकसित करने का दायित्व था और BRO इस दायित्व को पूरा करने के लिये काफी तेज़ी से कार्य कर रहा है। इसके अलावा सीमा सड़क संगठन ने भूटान, म्याँमार, अफगानिस्तान आदि मित्र देशों में भी सड़कों का निर्माण किया है।

11.रवींद्रनाथ टैगोर की 161वीं जयंती

07 मई, 2022 को देश भर में विश्व प्रसिद्ध कवि, साहित्यकार और दार्शनिक रवींद्रनाथ टैगोर की 161वीं जयंती मनाई जा रही है। रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 07 मई, 1861 को ब्रिटिश भारत में बंगाल प्रेसीडेंसी के कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। उनके बचपन का नाम रोबिंद्रोनाथ ठाकुर था। बहुमुखी प्रतिभा के धनी रवींद्रनाथ टैगोर ने बांग्ला साहित्य और संगीत को काफी महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया। इसके अलावा उन्होंने 19वीं सदी के अंत एवं 20वीं शताब्दी की शुरुआत में प्रासंगिक आधुनिकतावाद के साथ भारतीय कला का पुनरुत्थान किया। रवींद्रनाथ टैगोर एक नीतिज्ञ, कवि, संगीतकार, कलाकार एवं आयुर्वेद-शोधकर्त्ता भी थे। उन्होंने मात्र 8 वर्ष की आयु में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था और 16 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संग्रह प्रकाशित हुआ था। रवींद्रनाथ टैगोर का मानना ​​था कि उचित शिक्षा तथ्यों की व्याख्या नहीं करती है, बल्कि जिज्ञासा को बढ़ाती है। रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी काव्य रचना ‘गीतांजलि’ के लिये वर्ष 1913 में साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था और इस तरह वह नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय थे। ‘गीतांजलि’ को मूल रूप से बांग्ला भाषा में लिखा गया था तथा बाद में इसका अंग्रेज़ी में अनुवाद किया गया। भारतीय राष्ट्रगान (जन गण मन), बांग्लादेश का राष्ट्रगान (आमार सोनार बांग्ला) भी उनके द्वारा ही रचित है। श्रीलंका के राष्ट्रगान को भी उनकी रचनाओं से प्रेरित माना जाता है। ज्ञात हो कि रवींद्रनाथ टैगोर ने ही महात्मा गांधी को ‘महात्मा’ की उपाधि दी थी।