
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में सीपीग्राम्स के लिए एआई-सक्षम वॉयस चैटबॉट ‘समाधान दीदी’ का शुभारंभ किया। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग द्वारा भाषिनी के सहयोग से विकसित यह चैटबॉट नागरिकों को संवादात्मक इंटरफेस के माध्यम से लोक शिकायतें दर्ज कराने में सक्षम बनाता है। संवाददाताओं को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने समाधान दीदी को सरकार की शिकायत निवारण प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने बताया कि समाधान दीदी वर्तमान में सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं का समर्थन करती है और अतिरिक्त क्षेत्रीय तथा स्थानीय भाषाओं को शामिल करने के प्रयास जारी हैं। समाधान दीदी वॉयस-आधारित और बहुभाषी शिकायत पंजीकरण प्रणाली है, जिसे नागरिकों के लिए शिकायत निवारण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये नागरिकों को उचित विभाग या प्राधिकरण से शीघ्र और कुशलतापूर्वक जुड़ने में मदद करती है। नागरिक कई भारतीय भाषाओं में आवाज या संदेश के माध्यम से शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। इससे शिकायत निवारण तेज, स्मार्ट और अधिक सुलभ हो जाता है।

म्यांमा के राष्ट्रपति ऊ मिन आऊँ लाइन् भारत की पांच दिन की यात्रा के दौरान नई दिल्ली पहुंच गए हैं। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। इससे पहले म्यांमा के राष्ट्रपति बिहार में गया गए और महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की। उनके साथ कई मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक नेताओं का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है। वर्तमान पद पर रहते हुए राष्ट्रपति ऊ मिन आऊँ लाइन् भारत की पहली यात्रा है।
3 केंद्र ने पुड्डुचेरी में दो नए विशेष आर्थिक क्षेत्र किए अधिसूचित

भारत सरकार ने केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी में दो नए विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) को अधिसूचित किया है। इन प्रस्तावों को वाणिज्य विभाग के तहत कार्य करने वाले ‘बोर्ड ऑफ अप्रूवल फॉर SEZ’ द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई थी।
शहरी स्थानीय निकाय (ULB) द्वारा विकसित पहला SEZ: अधिसूचित क्षेत्रों में से एक थट्टांचावडी गाँव में औलगारेट नगरपालिका द्वारा विकसित एक IT/ITES SEZ है। यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है क्योंकि यह भारत में किसी नगर निकाय (शहरी स्थानीय निकाय) द्वारा विकसित किया जाने वाला पहला SEZ है। यह 8.62 हेक्टेयर में विस्तृत, जिसमें 725 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश शामिल है और इससे 3,500 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की उम्मीद है।
PIPDIC द्वारा विकसित बहु-क्षेत्रीय SEZ: दूसरी परियोजना करसुर गाँव (विल्लियानूर तालुक) में ‘पॉन्डिचेरी इंडस्ट्रियल प्रमोशन डेवलपमेंट एंड इनवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन‘ (PIPDIC) द्वारा विकसित एक बहु-क्षेत्रीय SEZ है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय निर्यात को बढ़ावा देने के लिये विभिन्न प्रकार के विनिर्माण और सेवा उद्योगों को स्थापित करना है।
4 वित्त मंत्रालय द्वारा ED कैडर के पुनर्गठन को मंज़ूरी

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक बड़े कैडर पुनर्गठन को मंज़ूरी दी है, जिसके तहत इसके स्वीकृत पदों की संख्या लगभग 60% बढ़ाकर 2,029 से 3,256 कर दी गई है। कानूनी कैडर को अभियोजन और परामर्श कार्यों को समर्थन देने के लिये सुदृढ़ किया गया है, जबकि एक नया अधिनिर्णय विंग विभिन्न स्तरों पर पदों के साथ स्थापित किया गया है। इस पुनर्गठन का उद्देश्य एजेंसी की संचालन, कानूनी, अधिनिर्णय, मंत्रालयी और सुरक्षा क्षमता को मज़बूत करना है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भारत सरकार के राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय के अधीन एक बहु-विषयक वित्तीय जाँच एजेंसी है। इसकी स्थापना मूल रूप से 1 मई, 1956 को आर्थिक मामलों के विभाग में एक प्रवर्तन इकाई के रूप में की गई थी, जिसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 के तहत विदेशी मुद्रा नियंत्रण कानून के उल्लंघनों से निपटना था। यह आमतौर पर तब कार्य करता है जब किसी अनुसूचित अपराध से अपराध की आय उत्पन्न होती है और उसके धन शोधन, परतकरण, कब्ज़ा, उपयोग या उसे अवैध धन को वैध बताकर प्रस्तुत करने की आशंका होती है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने 30 मई, 2026 को लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में 19 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह खुला संग्रहालय भारतीय नौसेना की भावना, वीरता और पराक्रम को समर्पित है। इसमें आईएनएस गोमती के कलाकृतियों और हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया है, जिसे 34 वर्षों की सेवा के बाद 29 मई, 2022 को सेवामुक्त कर दिया गया था। इस पार्क में नौसेना युद्धपोत पर लगी एके 726 तोप, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए जेडआईएफ 101 लॉन्चर, सतह से सतह पर मार करने वाली और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, साथ ही आईएनएस गोमती का रडार, टॉरपीडो लॉन्चर, लंगर, जहाज के मस्तूल और अन्य कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। इसमें टीयू 142एम का एक वॉकथ्रू संग्रहालय भी है। टीयू 142एम एक लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान है और अब सेवा में नहीं है। नौसेना शौर्य संग्रहालय के द्वितीय चरण में निर्मित इस पार्क में भोजनालय, स्मारिका दुकान और उन्नत प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि प्रणाली जैसी कई पर्यटक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। आईएनएस गोमती का नाम जीवंत गोमती नदी के नाम पर रखा गया है और इसे 16 अप्रैल, 1988 को तत्कालीन रक्षा मंत्री द्वारा मझगांव डॉक लिमिटेड में शामिल किया गया था। गोदावरी श्रेणी के निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट में तीसरा जहाज, आईएनएस गोमती पश्चिमी बेड़े का सबसे पुराना युद्धपोत भी था जब इसे सेवामुक्त किया गया था।
6 बहुपक्षीय अभ्यास ‘प्रगति 2026’, मेघालय के उमरोई में संपन्न हुआ

मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में आयोजित बहुपक्षीय अभ्यास ‘प्रगति 2026’ का प्रथम आयोजन 72 घंटे के परीक्षण अभ्यास के साथ संपन्न हुआ। इसमें भाग लेने वाले सशस्त्र बलों की परस्पर सहयोग क्षमता, आपसी विश्वास और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के सामूहिक संकल्प का प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम में 13 मित्र देशों के छह उप प्रमुखों और 40 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भाग लिया। सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सभी प्रतिभागी देशों के गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी की। प्रगति का पूरा नाम है हिंद महासागर क्षेत्र में विकास और परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी (Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region)। इस अभ्यास में भारत, भूटान, कंबोडिया, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका, वियतनाम, इंडोनेशिया और लाओस के 400 से अधिक सैनिक एक साथ आए।

हाल ही में गुजरात वन विभाग ने गिर परिदृश्य तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में रोग-नियंत्रण उपायों को और अधिक सुदृढ़ किया है, क्योंकि गिर सोमनाथ और अमरेली जिलों में संदिग्ध बेबेसिया संक्रमण के कारण आठ शेर शावकों की मृत्यु हो गई। बेबेसियोसिस (Babesiosis) एक टिक्स (किलनी) द्वारा फैलने वाला परजीवी रोग है, जो बेबेसिया (Babesia) परजीवी के कारण होता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करता है और मनुष्यों तथा जानवरों—दोनों को प्रभावित कर सकता है। यह बेबेसियो वंश के प्रोटोजोअन परजीवियों के कारण होता है। मनुष्यों में महत्त्वपूर्ण प्रजातियों में बेबेसियो माइक्रोटी, बेबेसियो डायवर्जेंस, बेबेसियो डंकानी और एमओ-1 स्ट्रेन शामिल हैं। जानवरों में विभिन्न बेबेसियो प्रजातियाँ मवेशियों (livestock), पालतू जानवरों और वन्यजीवों को संक्रमित कर सकती हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित किलनी/चिचड़ी के काटने से फैलती है। मनुष्यों में यह रक्त आधान (खून चढ़ाने) के माध्यम से भी फैल सकती है, लेकिन जानवरों में किलनी द्वारा प्रसार ही मुख्य मार्ग है।
8 अरुणाचल प्रदेश में एक दुर्लभ ड्रैगनफ्लाई

एक दुर्लभ ड्रैगनफ्लाई, ‘गायनाकैंथा खासियाका’ या ‘लॉन्ग-टेल्ड डस्कहॉकर‘, को आखिरी बार वर्ष 1914 में तत्कालीन एबोर हिल्स में देखे जाने के बाद अब अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग ज़िले में पुनः खोजा गया है। इसकी यह नई उपस्थिति नामदफा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य में दर्ज की गई है, जो पिछले स्थान से लगभग 600 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। ड्रैगनफ्लाई और डैम्सेलफ्लाई ‘ओडोनाटा‘ गण से संबंधित हैं और मीठे जल के पारिस्थितिकी तंत्र के महत्त्वपूर्ण घटक हैं, जो जलीय खाद्य जाल में शिकारी और शिकार दोनों के रूप में कार्य करते हैं। ‘लॉन्ग-टेल्ड डस्कहॉकर’ की दो संयुक्त आँखें होती हैं, जिनमें से प्रत्येक में हज़ारों छोटे लेंस और फोटोरिसेप्टर क्लस्टर होते हैं, जो इसे तीव्र दृश्य क्षमता प्रदान करते हैं। ‘गायनाकांथा’ वंश में हल्के भूरे और हरे रंग वाले बड़े आकार के ड्रैगनफ्लाई शामिल हैं जो गोधूलि वेला में सक्रिय होते हैं। इसमें वैश्विक स्तर पर 92 प्रजातियाँ, दक्षिण-पूर्व एशिया में लगभग 30 और भारत में 10 प्रजातियाँ शामिल हैं। ओडोनाटा की वैश्विक विविधता 693 वंशों में 6,442 प्रजातियों तक विस्तृत है। भारत ओडोनाटा की 152 वंशों और 18 परिवारों में फैली 504 प्रजातियों एवं 27 उप-प्रजातियों का घर है, जबकि अकेले अरुणाचल प्रदेश में इसकी 110 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। नामदफा राष्ट्रीय उद्यान अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग ज़िले में भारत–म्याँमार सीमा के निकट स्थित है। यह मिश्मी पहाड़ियों की दाफा बुम पर्वतमाला और पटकाई पर्वतमाला के बीच स्थित है।

नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में 28 और 29 मई को आयोजित राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर जुटे। इस दो दिवसीय सम्मेलन में कृषि को केवल उत्पादन का विषय नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण, किसान आय और भविष्य की सुरक्षा से जोड़ते हुए एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखने का संकल्प लिया गया। पूसा परिसर में आयोजित इस सम्मेलन में पहले दिन राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने खरीफ सीजन की तैयारियों, बीज, उर्वरक, जल प्रबंधन और फसल योजना पर विस्तार से चर्चा की। दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्रियों ने मिलकर खरीफ रणनीति को नीतिगत और क्रियान्वयन स्तर पर मजबूत करने का संकल्प लिया। सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ को प्रमुख पहल के रूप में सामने रखा गया, जिसका उद्देश्य केवल कृषि भूमि की रक्षा नहीं, बल्कि पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित रखना बताया गया। साथ ही रासायनिक उर्वरकों के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग पर भी जोर दिया गया, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे।
10 हिंदी पत्रकारिता दिवस

इतिहास में कुछ तिथियां केवल कालगणना का हिस्सा नहीं होतीं, वे सभ्यता की दिशा बदलने वाली घटनाओं की साक्षी बन जाती हैं। भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में 30 मई 1826 ऐसी ही एक अमर तिथि है। इसी दिन कलकत्ता के कोलू टोला मोहल्ले से पंडित जुगल किशोर शुक्ल के संपादन में हिंदी का प्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ प्रकाशित हुआ। यह केवल एक समाचार पत्र का जन्म नहीं था, बल्कि भारतीय जनमानस की भाषाई चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के पुनर्जागरण का उद्घोष था।