भारत-अमेरिका के पहले अंतरिक्ष सहयोग निसार को सटीक कक्षा में स्थापित किया गया

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1 भारत-अमेरिका के पहले अंतरिक्ष सहयोग निसार को सटीक कक्षा में स्थापित किया गया

भारत और अमेरिका ने अपने पहले अंतरिक्ष सहयोग का जश्न जीएसएलवी रॉकेट की सफल उड़ान के साथ मनाया, जिसने एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, निसार, को एक सटीक कक्षा में स्थापित कर दिया। निसार, इसरो और नासा द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया था। इसरो के अनुसार, जीएसएलवी ने निसार को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। इसरो के जीएसएलवी एफ-16 ने लगभग 19 मिनट और लगभग 745 किलोमीटर की उड़ान के बाद सिंथेटिक अपर्चर रडार उपग्रह को इच्छित सूर्य समकालिक ध्रुवीय कक्षा (एसएसपीओ) में स्थापित कर दिया। इस उपग्रह का सफल प्रक्षेपण पृथ्वी के अवलोकन मिशनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि इसकी दोहरी रडार क्षमता, एल-बैंड और एस-बैंड प्रणालियाँ, क्रायोस्फीयर, पारिस्थितिकी तंत्र और ठोस पृथ्वी के बारे में सटीक डेटा प्रदान करेंगी। निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार) एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है। यह पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसमें धरती को देखने के लिए दो अलग-अलग फ्रीक्वेंसी वाले रडार, नासा का एल-बैंड और इसरो का एस-बैंड, का इस्तेमाल किया गया है। निसार न केवल चक्रवात, बाढ़ आदि जैसी आपदाओं के सटीक प्रबंधन में मदद करेगा, बल्कि इसमें कोहरे, घने बादलों और बर्फ की परतों को भेदने की क्षमता भी है।

2 भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष 127 साल बाद भारत लौटे

 

पीएम मोदी ने भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों की 127 साल बाद भारत वापसी पर खुशी जताते हुए इसे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व का क्षण बताया है। पिपरहवा अवशेष वो पवित्र वस्तुएं हैं जो वर्ष 1898 में ब्रिटिश अधिकारी विलियम क्लॉक्सटन पेप्पे द्वारा उत्तर प्रदेश के पिपरहवा स्तूप की खुदाई के दौरान प्राप्त हुए थे। इनमें हड्डियों के टुकड़े, क्रिस्टल के पात्र, सोने के आभूषण और अन्य चढ़ावे शामिल थे, जो बौद्ध परंपरा के अनुसार स्तूप में रखे गए थे। एक ब्राह्मी लिपि के शिलालेख से यह पुष्टि होती है कि ये अवशेष शाक्य वंश द्वारा भगवान बुद्ध के लिए समर्पित किए गए थे जो कि बुद्ध का ही परिवार था। वर्ष 1899 में अधिकांश अवशेष कोलकाता के इंडियन म्यूजियम को सौंप दिए गए थे, हालांकि कुछ हिस्से ब्रिटिश अधिकारी पेप्पे के परिवार के पास निजी रूप से रह गए थे। वर्षों तक ये निजी संग्रह में रहे और 2025 में ये अवशेष अचानक हांगकांग में Sotheby’s नीलामी में सामने आए, जिसे देख कर भारत सरकार सतर्क हुई। चूंकि ये अवशेष भारत के कानून के अनुसार ‘AA’ श्रेणी की प्राचीन धरोहर हैं, इन्हें बेचना या भारत से बाहर ले जाना गैरकानूनी है। ऐसे में भारत के संस्कृति मंत्रालय ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया। कूटनीतिक और कानूनी प्रयासों से भारत ने नीलामी को रुकवाया और अवशेषों को सुरक्षित वापस लाया गया।

3 भारत, यूएई ने समुद्री सुरक्षा और संरक्षा सहयोग पर समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) और संयुक्त अरब अमीरात राष्ट्रीय रक्षक कमान ने नई दिल्ली में समुद्री सुरक्षा और संरक्षा सहयोग पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय समुद्री सहयोग को बढ़ाना और क्षेत्र में एक सुरक्षित, संरक्षित और टिकाऊ समुद्री वातावरण में योगदान देना है। मित्र देशों (एफएफसी) की तटरक्षक एजेंसियों के साथ यह दसवाँ ऐसा समझौता है, जो समुद्री खोज और बचाव (एम-एसएआर), अंतरराष्ट्रीय समुद्री अपराधों से निपटने, समुद्री कानून प्रवर्तन (एमएलई), समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया (एमपीआर) और संयुक्त क्षमता निर्माण सहित प्रमुख कार्यों में दोनों तटरक्षकों के बीच पेशेवर संबंधों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। भारत और यूएई के बीच 13वीं संयुक्त रक्षा सहयोग समिति (जेडीसीसी) की बैठक के दौरान भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि और यूएई तटरक्षक समूह के कमांडर ब्रिगेडियर स्टाफ खालिद ओबैद शम्सी द्वारा समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

4 महाराष्ट्र 7 अगस्त को डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के सम्मान में सतत कृषि दिवस के रूप में मनाएगा

महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की है कि भारत की हरित क्रांति के सूत्रधार, भारत रत्न डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में 7 अगस्त को प्रतिवर्ष “सतत कृषि दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। गेहूँ और चावल की उत्पादकता बढ़ाने में डॉ. स्वामीनाथन के अग्रणी अनुसंधान ने भारत को खाद्यान्न आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्थिरता प्राप्त करने में मदद की। उनके योगदान को मान्यता देते हुए, भारत सरकार ने उन्हें 2024 में भारत रत्न से सम्मानित किया। संयुक्त राष्ट्र ने भी उन्हें आर्थिक पर्यावरण के जनक के रूप में मान्यता दी है।

5 ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यूट्यूब बैन, अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पहले से है पाबंद

 

ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने बड़ा फैसला करते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में यूट्यूब को भी शामिल किए जाने की घोषणा की है। इससे पहले यूट्यूब को इस नियम से छूट हासिल थी लेकिन सरकार ने अब इसे बदल दिया है। हालांकि यूट्यूब किड्स इससे मुक्त रहेगा। नया नियम 10 दिसंबर से लागू होगा। ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने अपने ताजा आदेश में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यूट्यूब को बैन कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, स्नैपचैट और एक्स के इस्तेमाल पर पाबंदी है।

6 रूस के कामचटका में 8.7 तीव्रता का भूकंप

रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र कामचटका में मंगलवार रात 11:24 बजे (GMT) 8.7 तीव्रता का भूकंप आया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र पेत्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की शहर से 125 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में, अवाचा खाड़ी के पास 19.3 किलोमीटर की गहराई पर था। इससे सतह पर जोरदार झटके महसूस किए गए। हालांकि USGS ने पहले भूकंप की तीव्रता 8.0 बताई थी, लेकिन बाद में नए आंकड़ों के अनुसार इसे 8.7 कर दिया गया। इस शक्तिशाली भूकंप के बाद प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। कामचटका क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है क्योंकि यह “प्रशांत रिंग ऑफ फायर” पर स्थित है। यह वह इलाका है जहां टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं।

7 ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ का किया ऐलान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत से होने वाले आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ और अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला 1 अगस्त से लागू होगा। यह घोषणा ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर की। ट्रंप ने कहा कि यह निर्णय भारत द्वारा रूस से सैन्य उपकरण और ऊर्जा खरीदने को लेकर भी लिया गया है। ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध के बीच भारत द्वारा रूस से हथियार और ऊर्जा खरीद जारी रखने की आलोचना की।

8 खो-खो को AIESCB के खेल कैलेंडर में मिली आधिकारिक मान्यता

खो-खो अब क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी जैसे 16 प्रमुख खेलों के समकक्ष होगा। महज इतना ही नहीं, अब इससे खिलाड़ियों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। जी हां, भारतीय पारंपरिक खेल खो-खो ने खेल जगत में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अखिल भारतीय विद्युत क्रीड़ा नियंत्रण बोर्ड (AIESCB) ने अपनी मुंबई में आयोजित वार्षिक आम सभा बैठक में खो-खो को अपने आधिकारिक खेल कैलेंडर में शामिल करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत खो-खो को क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, बैडमिंटन और टेनिस जैसे 16 अन्य प्रमुख खेलों के समकक्ष स्थान दिया गया है। AIESCB, जो भारत के ऊर्जा और विद्युत क्षेत्रों से जुड़े विभागों की प्रमुख खेल संस्था है, वर्षों से विभिन्न खेलों को बढ़ावा दे रही है। खो-खो को इस कैलेंडर में शामिल करने से न केवल खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी मंच मिलेगा, बल्कि खेल कोटे के तहत रोजगार के स्थायी अवसर भी उपलब्ध होंगे। इससे पहले भारतीय सेना और भारतीय रेल जैसी संस्थाओं ने भी खो-खो को अपने खेल कैलेंडर में शामिल किया था, और अब AIESCB की मान्यता ने इस खेल की राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया है।

9 पीएम मोदी ने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मेघनाद देसाई के निधन पर जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मेघनाद देसाई के निधन पर शोक जताया। साथ ही उन्होंने भारत-ब्रिटेन संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में उनकी भूमिका की सराहना की। मेघनाद देसाई का जन्म गुजरात में हुआ था, उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। उन्हें लॉर्ड की उपाधि भी मिली थी। वे लंदन के स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर थे, खासकर शिक्षा और राजनीति के क्षेत्र में उनका अमूल्य योगदान रहा है। देसाई ने साल 1992 में एलएसई में सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ग्लोबल गवर्नेंस की स्थापना की। 1990 से 1995 तक वह एलएसई के डेवलपमेंट स्टडीज इंस्टीट्यूट के निदेशक और संस्थापक सदस्य रहे। उनका शोध 50 सालों से अधिक समय तक चला। देसाई ने निजी क्षेत्र और राज्य के विकास एवं मार्क्सवादी अर्थशास्त्र पर प्रभाव से संबंधित विषयों पर काम किया, जिसमें वैश्वीकरण और बाजार उदारीकरण शामिल हैं। उनकी कुछ पुस्तकों में मार्क्सवादी आर्थिक सिद्धांत, मार्क्स का प्रतिशोध: पूंजीवाद का पुनरुत्थान और राज्यवादी समाजवाद की मृत्यु, भारत की पुनर्खोज और भगवद् गीता किसने लिखी, शामिल हैं।