भारत को शहीद सैनिकों की याद में विशेष टोपी पहनने की अनुमति दी गयी थी- आईसीसी

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1.पिनाका निर्देशित हथियार प्रणाली ने सफलतापूर्वक परीक्षण किया:-

रक्षा अनुसंधान और रक्षा संगठन (DRDO) ने सोमवार को पोखरण रेंज से मल्टीबैरल पिनाका रॉकेट प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह रॉकेट प्रणाली लंबी दूरी से दुश्मन के ठिकानों को ध्वस्त करने में सक्षम है। सोमवार को इसके 2 परीक्षण किए गए जो पूरी तरह सफल रहे। दोनों परीक्षणों में 90 किमी दूर स्थित लक्ष्य को ध्वस्त करने में सफलता हासिल की गई।
डीआरडीओ के अनुसार यह हथियार भारतीय सेना की आर्टिलरी में नई जान फूंकने में सक्षम है। डीआरडीओ ने आगे कहा कि टेलीमेट्री सिस्टम ने उड़ान पथ के सभी ट्रैक की निगरानी की, इससे पता चला कि सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया गया है। डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित गाइडेड पिनाका को शामिल करने से तोपखाने की क्षमता को काफी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि निर्देशित पिनाका के सफल परीक्षण ने देश की तकनीकी ताकत को सटीक और आधुनिक हथियारों में परिवर्तित कर दिया है। भारतीय सेना के लिए आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (ARDE)पुणे और रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (DRDL) हैदराबाद, के माध्यम से पिनाका को संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
पीआईबी (प्रेस इन्फर्मेशन ब्यूरो) ने एक बयान में कहा है कि डीआरडीओ ने सोमवार को पोखरण रेंज से गाइडेड पिनाका का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। हथियार प्रणाली अत्याधुनिक मार्गदर्शन किट से सुसज्जित है जिसमें एक उन्नत नेविगेशन और नियंत्रण प्रणाली शामिल है। दोनों मिशनों में, हथियार प्रणालियों ने उच्च सटीकता के साथ लक्ष्यों को प्रभावित किया और वांछित लक्ष्य हासिल किया।
बता दें कि पिनाका रॉकेट प्रणाली अत्याधुनिक गाइडेंस सिस्टम से लैस है जिसमें एडवांस नेवीगेशन और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं। दोनों ही परीक्षणों में रॉकेट ने अपेक्षित लक्ष्य को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया। टेस्ट में रॉकेट प्रणाली ने बेहद सूक्ष्म और सटीक निशाना लगाया। परीक्षण के दौरान रॉकेट को ट्रैक करते हुए इस पर नजर रखी गई। टेस्ट में हथियार प्रणाली ने सभी अपेक्षित उद्देश्यों को पूरा किया।
गौरतलब है कि इस रॉकेट प्रणाली ने मई 2018 में आयोजित अंतिम परीक्षणों में 70-किमी के निशान को छुआ था जिसमें पिनाका प्रणाली की दक्षता में वृद्धि का संकेत देने की बात कही गई थी। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी जब भारतीय सेना ने पहाड़ की चौकियों पर तैनात पाकिस्तानी चौकियों को सटीक निशाना बनाया था तब इस रॉकेट प्रणाली का प्रमुख रूप से इस्तेमाल किया गया था। पिनाका रॉकेट धीरे-धीरे रूसी SMERCH की जगह लेगा।

2.अहार का 34 वां संस्करण – नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय खाद्य और आतिथ्य मेला शुरू हुआ:-

अहार का 34 वां संस्करणअंतर्राष्ट्रीय खाद्य और आतिथ्य मेला आज नई दिल्ली में शुरू हुआ। इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन, ITPO द्वारा आयोजित पांच दिवसीय मेले में भारत और विदेशों के 560 से अधिक प्रतिभागियों के खाद्य उत्पादों, मशीनरी, खाद्य और पेय पदार्थ उपकरण, आतिथ्य और सजावट के समाधान, कन्फेक्शनरी आइटम शामिल हैं। मेले में विदेशी प्रतिभागी चीन, जर्मनी, हांगकांग, इटली, इंडोनेशिया, जापान, रूस, स्पेन, अमेरिका और ब्रिटेन सहित अन्य देशों के हैं।

3.भारत को शहीद सैनिकों की याद में विशेष टोपी पहनने की अनुमति दी गयी थीआईसीसी:-

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने सोमवार को कहा कि भारत को आस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच में देश के सैन्य बलों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिये सैनिकों जैसी टोपी पहनने की अनुमति दी गयी थी। पाकिस्तान ने इस पर आपत्ति जतायी थी। रांची में आठ मार्च को खेले गये तीसरे वनडे में भारतीय टीम ने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद सीआरपीएफ जवानों के सम्मान में सैन्य टोपियां पहनी थी तथा अपनी मैच फीस राष्ट्रीय रक्षा कोष में दान कर दी थी।
आईसीसी के महाप्रबंधक (रणनीतिक संचार) क्लेरी फुर्लोग ने बयान में कहा, ‘‘बीसीसीआई ने धन जुटाने और शहीद सैनिकों की याद में टोपी पहनने की अनुमति मांगी थी और उसे इसकी अनुमति दे दी गयी थी।’’पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी को इस संबंध में कड़ा पत्र भेजा था और इस तरह की टोपी पहनने के लिये भारत के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।
पीसीबी प्रमुख एहसान मनि ने रविवार को कराची में कहा, ‘‘उन्होंने किसी अन्य उद्देश्य के लिये आईसीसी से अनुमति ली थी और उसका उपयोग दूसरे उद्देश्य के लिये किया जो कि स्वीकार्य नहीं है।’’
बीसीसीआई ने पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों के शहीद होने के बाद आईसीसी से उन देशों के साथ संबंध तोड़ने के लिये कहा था जो आतंकवाद को पनाह देते हैं।

4.नारी शक्ति : देश की पहली और एकमात्र महिला कमांडो ट्रेनर के ये हैं फौलादी इरादे:-

वह देश की पहली और एकमात्र महिला कमांडो ट्रेनर हैं, जिन्होंने ब्रूस ली के स्टूडेंट ग्रैंड मास्टर रिचर्ड बस्टिलो से ब्रूस ली आर्ट एवं सिद्धांतों को भी आत्मसात किया है। बीते दो दशक में मेहमान ट्रेनर के तौर पर देश सेना के 20 हजार जवानों को मुफ्त ट्रेनिंग दे चुकी हैं। यह सिलसिला अब भी जारी है। देशदुनिया की करोड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकीं 50 वर्षीय डॉ. सीमा राव के इसी समर्पण एवं जज्बे को देखते हुए हाल ही में राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति सम्मान-2019 से नवाजा गया है। डॉ. सीमा कहती हैं कि उम्र तो सिर्फ एक संख्या है, मेरे इरादे अब भी फौलादी हैं।

मुंबई निवासी डॉ. सीमा राव ने हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से इम्युनोलॉजी और डोएन यूनिवर्सिटी से लाइफस्टाइल मेडिसिन का कोर्स किया है। साथ ही, वेस्टमिन्स्टर बिजनेस स्कूल से लीडरशिप संबंधी पढ़ाई भी की है। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, जि इन्हें कॉम्बैट ट्रेनर बना दिया। वह बताती हैं, ‘स्कूली दिनों में कुछ ऐसे वाकये हुए थे, जिससे मैंने खुद को काफी असहाय एवं मजबूर महसूस किया। तभी मैंने निश्चय कर लिया कि कमजोर बनकर नहीं रहना है।

पति मेजर दीपक राव से मिली प्रेरणा

इसके बाद तमाम डर को दरकिनार कर इन्होंने अमेरिका स्थित पैडी से स्कूबा डाइविंग, आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से माउंटेनियरिंग, ताइंक्वाडो इत्यादि का प्रशिक्षण लिया। जब शादी हुई, तो पति मेजर दीपक राव से प्रेरित होकर उनसे मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ली। आज ये अनआर्म्ड कॉम्बैट में सेवन डिग्री एवं इजरायली क्रव मागा में फर्स्ट डिग्री की ब्लैक बेल्ट होल्डर हैं। उन्हें एयर राइफल शूटिंग में भी महारत हासिल है। कहती हैं,‘किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि एक महिला होकर मैं जवानों को युद्ध कौशल का प्रशिक्षण दे सकूंगी। लेकिन मैं अपनी स्किल्स की बदौलत कॉम्बैट शूटिंग इंस्ट्रक्टर बनने में सफल रही।

जवानों की आंखों में सम्मान देखकर गर्व होता है। डॉ. सीमा के अनुसार, क्लोज क्वार्टर बैटल (सीक्यूबी) एक्सपर्ट बनना कहीं से आसान नहीं था। भारतीय सेना के अधिकारियों को कायल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। कई दौर की बातचीत एवं कौशल प्रदर्शन के बाद जवानों को कॉम्बैट ट्रेनिंग देने का सिलसिला शुरू हुआ। वह बताती हैं, ‘मुझे अक्सर पुरुष जवानों को ट्रेन करना होता था। इसलिए अपनी फिटनेस का विशेष ध्यान रखा। समयसमय पर अपनी स्किल्स को अपग्रेड करती रही। सीक्यूबी मेथोडोलॉजी संबंधी सर्टिफिकेशंस हासिल किए। आज जब जवानों की आंखों में खुद के लिए सम्मान देखती हूं, तो गर्व महसूस होता है।

दरअसल, डॉ. सीमा के पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके प्रभाव के कारण इनके अंदर भी देशसेवा की भावना प्रगाढ़ रही। उसी के तहत वे ट्रेनिंग के एवज में जवानों से कोई शुल्क नहीं लेती हैं। बताती हैं, ‘शुरुआत में तो अपनी जमा पूंजी भी लगा दिया करती थी, जिससे कई बार दिवालियेपन की स्थिति पैदा हो जाती थी। बावजूद इसके, कोई अफसोस नहीं रहा।

डॉ. सीमा ने क्लोज कॉम्बैट को लेकर दुनिया की पहली इनसाइक्लोपीडिया तैयार की है और उसकी करीब 1000 प्रतियां गृह मंत्रालय के साथ-साथ भारतीय सेना को सौंप चुकी हैं। इन्होंने ‘कमांडो मैनुअल ऑफ कॉम्बैट’ भी तैयार किया। ब्रिटेन की महारानी, अमेरिका की एफबीआइ एवं इंटरपोल ने इनकी किताबों को ‘स्वाट’, ‘इंटरपोल’ एवं ‘एफबीआइ’ की लाइब्रेरी में स्थान दिया।  

5.6 लाख करोड़ रुपये हुआ HDFC बैंक का बाजार पूंजीकरण, RIL-TCS के बाद तीसरी मूल्यवान कंपनी बनी:-

एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण 6 लाख करोड़ रुपये के पार हो गया है। बुधवार को कंपनी के शेयरों में आई तेजी के बाद वह बाजार पूंजीकरण के आधार पर भारत की तीसरी बड़ी मूल्यवान कंपनी बनने में सफल रही है।

करीब 8.50 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे अधिक मूल्यवान कंपनी बनी हुई है, वहीं 7.50 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण के साथ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) तीसरी बड़ी कंपनी है।

लगातार पांचवें दिन एचडीएफसी के शेयरों में तेजी रही और बुधवार की ट्रेडिंग के दौरान यह 2233 रुपये के स्तर को छूने में सफल रहा, जो 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर है।

इंट्रा डे के दौरान स्टॉक का निचला स्तर 2172 रुपये रहा। ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक एचडीएफसी बैंक को कवर करने वाले विश्लेषकों में से 50 ने इसे खरीदने की सलाह दी है, जबकि तीन ने होल्ड की सलाह दी। वहीं एक ने इसे बेचने की सलाह दी है।

6.भारत ने नेपाली छात्रों को 200 स्वर्ण जयंती छात्रवृत्ति प्रदान की:-

नेपाल में भारतीय दूतावास ने बुधवार को कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों को जारी रखने के लिए मेधावी नेपाली छात्रों को 200 स्वर्ण जयंती छात्रवृत्ति प्रदान की। काठमांडू में छात्रों को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए नेपाल के शिक्षा सचिव खागा राज बराल ने कहा, भारत नेपाल में शिक्षा के विकास के लिए बहुमूल्य सहायता प्रदान करता रहा है। उन्होंने कहा, भारत सरकार की छात्रवृत्ति के साथ, नेपाली छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और इससे नेपाल के मानव संसाधन विकास में मदद मिली है। नेपाल में भारतीय राजदूत, मनोज सिंह पुरी ने अपने संबोधन में छात्रों को व्यक्तिगत और व्यावसायिक पूर्ति प्राप्त करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, यह नेपाल के सामाजिकआर्थिक विकास में योगदान देगा और भारतनेपाल संबंधों को और गहरा और मजबूत करेगा।इस साल एमबीबीएस, बीडीएस, बीई, बीएससी, बीबीए और बीकॉम आदि सहित 36 स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए छात्रवृत्ति प्राप्तकर्ताओं को कवर किया गया है। छात्रों को नेपाल के 50 जिलों से शॉर्टलिस्ट किया गया है। इनमें लगभग 45 प्रतिशत लड़कियां और 8 प्रतिशत अलगअलग सक्षम छात्र शामिल हैं। भारत सरकार ने भारतनेपाल आर्थिक सहयोग के 50 साल पूरे होने के अवसर पर 2002 में प्रतिष्ठित स्वर्ण जयंती छात्रवृत्ति योजना शुरू की थी। 

इस योजना के तहत, एक एमबीबीएस / बीडीएस छात्र को पांच साल तक प्रति माह 4000 नेपाली रुपए (एनआर) मिलते हैं, एक बीई छात्र को 4000 एनआर मिलते हैं। चार साल के लिए प्रति माह और अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को 3000 एनआर मिलते हैं। तीन साल के लिए प्रति माह। अब तक नेपाल के 77 जिलों से 2350 से अधिक नेपाली छात्रों को स्वर्ण जयंती छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया है। भारत सरकार नेपाल और भारत में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अध्ययन के लिए चिकित्सा, विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान, औषध विज्ञान, दंत चिकित्सा विज्ञान, कृषि, इंजीनियरिंग, कला, वाणिज्य, विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, नर्सिंग और कई अन्य विषयों में कुल 3000 छात्रवृत्ति प्रदान करती है।  ये छात्रवृत्ति भारत के हिमालयी राष्ट्र और उसके लोगों के समग्र सामाजिकआर्थिक विकास के लिए नेपाल में मानव संसाधन विकास का समर्थन करने के प्रयासों का हिस्सा है।