रूस का यूक्रेन पर बड़ा हमला: हाइपरसोनिक ओरेश्निक बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग

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1 रूस का यूक्रेन पर बड़ा हमला: हाइपरसोनिक ओरेश्निक बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग

रूस ने कथित रूप से यूक्रेन पर बड़े पैमाने के ड्रोन और मिसाइल हमले के दौरान अपनी हाइपरसोनिक ओरेश्निक बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग किया, जो रूस-यूक्रेन युद्ध में इस हथियार के तीसरे उपयोग के रूप में सामने आया है। ओरेश्निक एक रूसी हाइपरसोनिक मध्यम-दूरी बैलिस्टिक मिसाइल है, जो पारंपरिक तथा परमाणु दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है और इसे RS-26 रूबेज़ मिसाइल प्रणाली से जुड़ा माना जाता है। रूसी भाषा में इसके नाम का अर्थ “हेज़ल वृक्ष” या “हेज़लनट वृक्ष” होता है। इसकी प्रमुख विशेषता बहु-वारहेड ले जाने की क्षमता है, जिससे यह अलग-अलग लक्ष्यों पर प्रहार कर सकती है या प्रभाव क्षेत्र को अधिक विस्तृत बना सकती है। बहु-वारहेड क्षमता वायु रक्षा अवरोधन को जटिल बना सकती है और सामान्यतः इसे लंबी दूरी की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों से जोड़ा जाता है। रूस का दावा है कि यह मिसाइल लगभग मैक 10, अर्थात् ध्वनि की गति से लगभग दस गुना अधिक गति से यात्रा कर सकती है, जिससे मौजूदा मिसाइल रक्षा प्रणालियों द्वारा इसे रोकना अत्यंत कठिन हो जाता है।

2 इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ अल्ट्रा रनर्स 24-घंटे एशिया और ओशिनिया चैंपियनशिप में पाँच पदकों के साथ भारत ने इतिहास रचा

जापान में हुई इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ अल्ट्रा रनर्स 24-घंटे एशिया और ओशिनिया चैंपियनशिप में भारत ने इतिहास रच दिया। भारत ने कुल पाँच मेडल जीते और पुरुषों की कैटेगरी में अपना दबदबा बनाया। अमर सिंह देवंदा ने 24 घंटे में 282.881 किलोमीटर की शानदार दूरी तय करके गोल्ड मेडल जीता। गीनो एंटनी ने 272.894 किलोमीटर की दूरी के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि ब्रॉन्ज़ मेडल भी भारत के ही नाम रहा। महिलाओं की कैटेगरी में, भारतीय टीम ने कुल 667.722 किलोमीटर की दूरी तय करके ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया। तेनज़िन डोलमा भारत की सबसे बेहतरीन खिलाड़ी रहीं, जिन्होंने व्यक्तिगत तौर पर चौथा स्थान हासिल किया। यह चैंपियनशिप जापान के हिरोसाकी शहर में आयोजित की गई थी, जिसमें नौ देशों के 81 एथलीटों ने इस एंड्योरेंस इवेंट में हिस्सा लिया।

3 विश्व थायरॉयड दिवस

प्रतिवर्ष 25 मई को विश्व थायरॉयड दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को थायरॉयड रोगों के प्रति जागरूक करना, प्रारंभिक जांच को बढ़ावा देना तथा बेहतर स्वास्थ्य नीतियों पर विचार करना है। विश्व थायरॉयड दिवस की शुरुआत वर्ष 2008 में वैश्विक स्तर पर थायरॉयड रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई। इस पहल का प्रमुख लक्ष्य केवल रोगों की जानकारी देना नहीं, बल्कि प्रारंभिक पहचान, समय पर उपचार और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना भी है। थायरॉयड ग्रंथि गर्दन के सामने सांस नली के ऊपर तथा स्वरयंत्र के नीचे स्थित होती है। इसके दो भाग होते हैं, जो मध्य में एक पतली संरचना से जुड़े रहते हैं और इसे तितली जैसा आकार प्रदान करते हैं। यह मुख्यतः तीन महत्वपूर्ण हार्मोन से संबंधित है। थायरोक्सिन (T4), यह शरीर में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला हार्मोन है। ट्रायोडोथायरोनिन (T3), यह अधिक सक्रिय हार्मोन होता है और कोशिकाओं की कार्यक्षमता को नियंत्रित करता है। थायरॉयड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (TSH), यह मस्तिष्क की पीयूष ग्रंथि से निकलता है तथा थायरॉयड हार्मोन के निर्माण को नियंत्रित करता है।थायरॉयड शरीर की कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन की गति निर्धारित करता है तथा भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। यह हृदय की धड़कनों की गति और रक्त परिसंचरण को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर के आंतरिक तापमान को सामान्य बनाए रखने में थायरॉयड की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

4 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार प्रदान किए

25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित सेरेमनी में पद्म पुरस्कार प्रदान किए। सेरेमनी के पहले चरण मेंस्वीकृत 131 पद्म पुरस्कारों में से 66 लोगों को सम्मानित किया गया। बाकी पुरस्कार विजेताओं को दूसरे चरण के समारोह में सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा गणतंत्र दिवस पर की गई थी। पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार हैं। इसकी स्थापना 1954 में की गई थी। ये पुरस्कार कला, साहित्य, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, सोशल वर्क, विज्ञान और इंजीनियरिंग, जनसंपर्क और व्यापार एवं उद्योग समेत कई अलग-अलग कैटेगरीज में दिया जाता है। इस साल सरकार की तरफ से 131 लोगों को पद्म अवॉर्ड्स के लिए चुना गया है। इनमें से 19 महिलाएं हैं। 5 हस्तियों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 को पद्म श्री के लिए चुना गया है। 2 हस्तियों को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसमें केरल के पूर्व सीएम वी.एस. अच्युतानंदन और बॉलीवुड अभिनेता धर्मेंद्र शामिल हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने पहले चरण में 2 पद्म विभूषण, 6 पद्म भूषण और 58 पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किए। पद्म भूषण से सम्मानित होने वालों में अभिनेता आर माधवन, क्रिकेटर रोहित शर्मा, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया और पैरा एथलीट प्रवीण कुमार शामिल रहे।

5 12 सांसदों और 4 समितियों को सांसद रत्‍न पुरस्‍कार

24 मई को संसद रत्न पुरस्कारों के विजेताओं के नामों की घोषणा की गई। 12 सांसदों और 4 संसदीय समितियों को संसद रत्न अवॉर्ड्स के लिए चुना गया है। इन 12 में से 10 लोकसभा सांसद और 2 राज्यसभा सांसद हैं। 4 लोकसभा सदस्यों को इंडिविजुअल कैटेगरी में चुना गया है- 1. उत्तर प्रदेश से जगदम्बिका पाल 2. राजस्थान से पी.पी. चौधरी 3. झारखंड से निशिकांत दुबे 4. महाराष्ट्र से श्रीकांत एकनाथ शिंदे
6 लोकसभा सांसदों को अलग-अलग कैटेगरीज में चुना गया है-1. उत्तर प्रदेश से प्रवीण पटेल 2. झारखंड से विद्युत बरन महतो 3. राजस्थान से लुंबाराम चौधरी 4. महाराष्ट्र से हेमंत विष्णु सावरा5. महाराष्ट्र से स्मिता उदय वाघ6. महाराष्ट्र से नरेश गणपत म्हस्के
राज्यसभा से महाराष्ट्र की मेधा विश्राम कुलकर्णी और गुजरात के नरहरि अमीन को सम्मानित किया गया है। सम्मानित 4 समितियां– 1. कृषि समिति, इसकी अध्यक्षता चरणजीत सिंह चन्नी कर रहे हैं।2. वित्त समिति, इसके अध्यक्ष भर्तृहरि महताब हैं।3. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज समिति, इसके अध्यक्ष सप्तगिरि शंकर उलाका हैं।4. कोयला एवं खान समिति, इसके अध्यक्ष अनुराग सिंह ठाकुर हैं। ये अवॉर्ड प्राइम पॉइंट फाउंडेशन की तरफ से संसद में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले सांसदों को दिया जाता है। इसकी शुरुआत 2010 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सलाह पर की गई थी।

6 राघव चड्ढा राज्यसभा की याचिका समिति के अध्यक्ष नियुक्त

हाल ही में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा की याचिका समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। याचिका समिति संसद की सबसे पुरानी समितियों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति 15 सितंबर, 1921 को काउंसिल ऑफ स्टेट में पारित उस प्रस्ताव से हुई थी, जिसके तहत साक्ष्य लेने की शक्ति वाली “लोक याचिका समिति” के गठन का प्रावधान किया गया था। इस समिति को वर्ष 1933 में इसका वर्तमान नाम “याचिका समिति” प्राप्त हुआ। राज्यसभा की याचिका समिति का गठन पहली बार 1952 में एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्यों के साथ किया गया था वर्ष 1964 में इसकी सदस्य संख्या बढ़ाकर दस कर दी गई, जो आज तक जारी है। यह राज्यसभा की एक स्थायी समिति है, जिसका गठन राज्यसभा की कार्यवाही एवं कार्य संचालन नियमावली के नियम 147 के अंतर्गत किया गया है। इसके सदस्यों का नामांकन राज्यसभा के सभापति द्वारा किया जाता है, जो समिति के अध्यक्ष की भी नियुक्ति करते हैं। समिति की गणपूर्ति (कोरम) पाँच सदस्यों की होती है और इसका पुनर्गठन सामान्यतः प्रतिवर्ष किया जाता है। समिति को संदर्भित याचिकाओं की जाँच करना, विशेष शिकायतों पर सदन को रिपोर्ट प्रस्तुत करना तथा व्यक्तिगत समाधान या व्यापक सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करना इसका प्रमुख कार्य है। समिति साक्ष्य ले सकती है, दस्तावेज़ मंगा सकती है, मंत्रालयों या विभागों से टिप्पणियाँ प्राप्त कर सकती है, गवाहों की जाँच कर सकती है, याचिकाकर्त्ताओं को सुन सकती है तथा शिकायतों के समाधान या उनकी पुनरावृत्ति रोकने हेतु सुधारात्मक उपाय सुझा सकती है।

7 असम विधानसभा में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ (UCC) बिल पेश

25 मई को असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC बिल पेश हुआ। बिल पर 27 मई को सदन में चर्चा की जाएगी। बिल पारित होने के बाद, असम उत्तराखंड और गुजरात के बाद UCC लागू करने वाला भारत का तीसरा राज्य बन जाएगा। UCC का उद्देश्य अलग-अलग पर्सनल लॉ को खत्‍म कर सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून बनाना है। विधेयक का मुख्य प्रावधान पैतृक संपत्ति में बेटे और बेटी दोनों को समान अधिकार देना है। बिल में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य किया गया है। UCC लागू होने के बाद राज्य में शादी, तलाक और उत्तराधिकार जैसे निजी मामलों में सभी समुदायों पर एक ही कानून लागू होगा।

8 चंदेरी में मिला विलुप्त माने जाने वाला इजिप्शियन वल्चर

24 मई को एमपी के चंदेरी में विलुप्‍तप्राय इजिप्शियन वल्‍चर पाया गया। इसे सफेद गिद्ध भी कहा जाता है। चंदेरी वन विभाग ने 22 से 24 मई तक विशेष गिद्ध गणना अभियान चलाया था। कुल 45 गिद्धों के साथ इजिप्शियन वल्‍चर भी पाया गया। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर यानी IUCN ने इस पक्षी को विलुप्‍त पक्षियों की कैटेगरी में रखा हुआ था। इजिप्शियन वल्चर को प्रकृति का सफाईकर्मी भी कहा जाता है। ये मृत जीवों का मांस खाकर पर्यावरण की सफाई में मदद करता है। चंदेरी में इजिप्शियन वल्चर की मौजूदगी दर्शाती है कि यहां का इकोसिस्टम इन दुर्लभ पक्षियों के फलने-फूलने के लिए अभी भी अनुकूल है।

9 आईआईटी मद्रास की हाईटेक मरीन रिसर्च से मिलेगी नई ताकत

भारत अपनी समुद्री ताकत को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी मिशन को नई गति देते हुए आईआईटी मद्रास ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के साथ मिलकर एक नई पहल की है। इसके अंतर्गत एक ऐसी अत्याधुनिक रिसर्च सुविधा शुरू की है, जो भारतीय जहाजों, पनडुब्बियों और नौसैनिक तकनीक को और ज्यादा शक्तिशाली, सुरक्षित व आधुनिक बनाएगी। दरअसल मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स देश की एक प्रमुख युद्धपोत निर्माण कंपनी है। यह अब तक 33 युद्धपोत व 8 पनडुब्बियां बना चुकी हैं। आईआईटी मद्रास ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स की मदद से 4.5 करोड़ रुपए की लागत वाली यह हाईटेक ‘सर्कुलेटिंग वॉटर टनल फैसिलिटी’ विकसित की है। यह समुद्री रिसर्च व स्वदेशी तकनीक विकास का नया केंद्र बनने जा रही है। यह सुविधा आईआईटी मद्रास के ‘डिस्कवरी’ सैटेलाइट कैंपस में स्थापित की गई है और अब पूरी तरह संचालन में आ चुकी है। यह केवल एक साधारण रिसर्च लैब नहीं, बल्कि समुद्री इंजीनियरिंग की ऐसी हाईटेक प्रयोगशाला है जहां वैज्ञानिक नियंत्रित जल और वायु प्रवाह के जरिए जहाजों, प्रोपेलर, समुद्री वाहनों और पानी के भीतर काम करने वाली संरचनाओं का व्यवहार समझ सकेंगे। यहां परीक्षणों के माध्यम से यह जाना जाएगा कि तेज धाराओं, समुद्री दबाव और कठिन परिस्थितियों में जहाज और उपकरण किस तरह प्रदर्शन करते हैं। इस सुविधा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भारत में स्वदेशी समुद्री तकनीक विकसित करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

10 प्रकाश से बनेगा सुरक्षा कवच, नकली करेंसी व उत्पादों की पहचान होगी आसान

नकली नोट, फर्जी दस्तावेज और ब्रांडेड उत्पादों की नकल आज वैश्विक चुनौती बन चुकी है। ऐसे में अब विज्ञान ने इस जालसाजी के खिलाफ एक नई ‘प्रकाश ढाल’ तैयार की है। आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक प्रकाश-उत्सर्जक पेरोव्स्काइट नैनोमैटेरियल विकसित किया है, जो ऐसे सुरक्षा पैटर्न बना सकता है जिन्हें सामान्य प्रिंटिंग या इमेजिंग तकनीकों से कॉपी करना लगभग असंभव होगा। यह तकनीक भविष्य में करेंसी, सरकारी दस्तावेजों और महंगे उत्पादों की नकल को रोकने व पहचानने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। व्यापक स्तर पर यह तकनीक उन सभी क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है, जहां उत्पाद प्रमाणीकरण और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। करेंसी नोट, पासपोर्ट, पहचान पत्र और कानूनी दस्तावेजों की सुरक्षा से लेकर लक्जरी वस्तुओं और उपभोक्ता उत्पाद उद्योगों तक इसका उपयोग किया जा सकता है। खास बात यह है कि इस शोध को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता मिली है। इसके निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल एडवांस्ड ऑप्टिकल मैटेरियल्स में प्रकाशित हुए हैं। शोध-पत्र आईआईटी गुवाहाटी के सहायक प्रोफेसर प्रो. सैकत भौमिक, प्रो. पी. के. गिरी तथा उनके शोधार्थी लतिका जुनेजा और गरिमा चौधरी ने तैयार किया है।

11 आईसीएमआर ने लॉन्च किया देश का सबसे बड़ा जैव चिकित्सा नवाचार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने सोमवार को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में देश के सबसे बड़े जैव चिकित्सा नवाचार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम “मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र : इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री कनेक्ट” का आयोजन किया। इस पहल के तहत जैव चिकित्सा नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए देश के पहले संरचित प्लेटफॉर्म की शुरुआत की गई। कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में निष्क्रिय केएफडी और चांदीपुरा वायरस बायोमटेरियल पहली बार उद्योग क्षेत्र के भागीदारों को सौंपे गए। इससे देश के जैव चिकित्सा अनुसंधान और टीका निर्माण इकोसिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस आयोजन में आईसीएमआर संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित 100 से अधिक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया। इनमें निदान, उपचार और चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी तकनीकें शामिल थीं। कार्यक्रम में नवप्रवर्तकों और उद्योग हितधारकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद की भी व्यवस्था की गई।