GENERAL KNOWLEDGE

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जेवर एयरपोर्ट को विकसित करने हेतु स्विट्जरलैंड की कंपनी को मिली सुरक्षा मंजूरी

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को विकसित करने के लिए स्विस फर्म ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी को सुरक्षा मंजूरी दे दी है. 5000 हेक्टेयर में फैले इस पूरे प्रोजेक्ट पर 29000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और गाजियाबाद के हिंडन हवाई अड्डे के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तीसरा हवाई अड्डा है.

जेवर एयरपोर्ट के लिए फरवरी में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी मिलने के बाद एयरपोर्ट की सुरक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी मांगी गई थी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 19 मई 2020 को एयरपोर्ट की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी मंजूरी दे दी हैं.

नाबार्ड ने खरीफ संचालन के लिए 20,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने हाल ही में 20,500 करोड़ रुपये जारी किए. यह फण्ड सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण विकास बैंकों (आरआरबी) के के लिए फ्रंट-लोडिंग संसाधनों के रूप में कार्य करेगा.

खरीफ संचालन में किसानों की मदद करने और उनकी प्री-मानसून तैयारियों के लिए यह धनराशि जारी की गई है. आवंटित राशि में से 15,200 करोड़ रुपये सहकारी बैंकों के माध्यम से और 5,300 करोड़ रुपये आरआरबी के माध्यम से प्रदान किए जायेंगे.

भारत की ओर से फलस्तीनी शरणार्थियों को आर्थिक मदद

भारत ने फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए आर्थिक सहायता का योगदान किया है. संयुक्त राष्ट्र  एजेंसी ने भारत के इस योगदान की सराहना की है विशेषकर तब जब दुनिया  महामारी के संकट से जूझ रही है. भारत सरकार ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र रिलीव एंड वर्क एजेंसी को दो मिलियन डॉलर की सहायता मुहैया करायी है.

फलस्तीनी शरणार्थियों के कल्याण के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी को यह योगदान भारत सरकार ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य सहित मुख्य कार्यक्रमों और सेवाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं निर्माण एजेंसी को हाल ही में दिया. संयुक्त राष्ट्र एजेंसी को यह योगदान फलस्तीन में भारत के प्रतिनिधि सुनील कुमार ने पेश किया था.

जानें क्यों मनाया जाता है विश्व मधुमक्खी दिवस

प्रत्येक साल 20 मई, को पूरी दुनिया में ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ (World Bee Day) मनाया जाता है. मधुमक्खिां, तितलियां, चमगादड़ और चिड़ियों जैसे परागणकों महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने, उनके सामने कई तरह के ख़तरों और विकास में उनके योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस के रूप में मनाए जानें का फैसला लिया. यह खास दिवस आधुनिक मधुमक्खी पालन की तकनीक का नेतृत्व करने वाले एंटोन जनसा के जन्म दिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. मधुमक्खियां सबसे बड़ी परागण होती हैं. वे वर्तमान में निवेश के नुकसान, परजीवी, बीमारियों और कृषि कीटनाशकों के कारण खतरे में हैं.

एक्सोप्लैनेट क्लाइमेट ‘डिकोडर’ जीवन की खोज में मदद करेगा

ग्रह की सतह, सूरज का रंग और कितने बादल ग्रहों को घेरते हैं, ये सभी एक एक्सोप्लैनेट की जलवायु को असरदार तरीके से बदल सकते हैं

कॉर्नेल विश्वविद्यालय के खगोलविद दूरस्थ आकाशगंगाओं में संभावित तौर पर रहने योग्य एक्सोप्लैनेट्स (बहिर्ग्रहों) के जलवायु सुराग प्राप्त करने के लिए एक व्यावहारिक मॉडल – एक पर्यावरणीय ‘कलर डीकोडर (विकोडक)’ – विकसित करने में सफल रहे हैं. यह मॉडल दर्जनों किस्म के ग्रहों की सतह और सूरजों की जांच करने के बाद विकसित किया गया है.

कॉर्नेल के कार्ल सगन इंस्टीट्यूट के निदेशक, लीसा कल्टेनेगर की लैब में काम करने वाले जैक मैडेन ने यह बताया कि, यह देखा गया कि दूर के सौर मंडल के रहने योग्य क्षेत्रों में विभिन्न ग्रहों की सतह एक्सोप्लेनेट्स की जलवायु को कैसे प्रभावित कर सकती है.

जैक मैडेन के अनुसार, ग्रहों की सतह पर परावर्तित प्रकाश न केवल समग्र ग्रह पर, बल्कि पृथ्वी जैसे ग्रहों के पता लगाने योग्य स्पेक्ट्रा (वर्णक्रम) के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

यह शोध कैसे हुआ?

लिसा कल्टेनेगर और जैक मैडेन ‘ हाउ सरफेसेस शेप दी क्लाइमेट ऑफ़ हाउसेबल एक्सोप्लैनेट्स’ के सह-लेखक हैं, जिसे रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी के मासिक नोटिस में जारी किया गया था.

उल्लिखित शोध में, उन्होंने जलवायु की गणना करने के लिए एक ग्रह की सतह के रंग और उसके मेजबान तारे से प्रकाश को जोड़ा. इसका एक उदाहरण होगा, एक चट्टानी, काला, बेसाल्ट ग्रह प्रकाश को अच्छी तरह से अवशोषित करेगा और बहुत गर्म होगा, लेकिन अगर उस ग्रह पर रेत और बादल भी मौजूद हैं, तो वह ग्रह ठंडा होगा. जबकि वनस्पति के साथ कोई ग्रह जो किसी लाल रंग के K स्टार की परिक्रमा कर रहा है, उसका तापमान ठंडा होने की संभावना है क्योंकि इन दोनों ग्रहों की सतह सूर्य की रोशनी को अलग तरीके से प्रतिबिंबित करती है.

मैडेन ने इसे एक शर्ट का उदाहरण देकर आगे समझाया है कि अगर आप गर्मी के मौसम में किसी दिन एक गहरे रंग की शर्ट पहनते हैं, तो आपको उस दिन अधिक गर्मी लगेगी क्योंकि गहरे रंग की आपकी शर्ट प्रकाश को प्रतिबिंबित नहीं करती बल्कि यह रोशनी को अवशोषित करती है और गर्मी बरकरार रखती है. लेकिन अगर आप हल्के रंग की शर्ट पहनते हैं, तो यह प्रकाश को प्रतिबिंबित करेगी और इस शर्त को पहनने से आपको ठंडक महसूस होगी.

कालटेनेगर ने उल्लेख किया कि यह सिद्धांत तारों और ग्रहों पर भी लागू होता है. एक्सोप्लैनेट के प्राथमिक रंग और तारे के प्रकार के आधार पर, ग्रह का रंग संबद्ध तारे द्वारा दी गई कुछ ऊर्जा को कम करने में सक्षम होता है.

कालटेनेगर ने यह भी बताया कि किसी ग्रह की सतह, सूरज का रंग और ग्रहों को चारों ओर से घेरे हुए बादल किसी भी एक्सोप्लैनेट की जलवायु को असरदार तरीके से बदल सकते हैं.

उन्नत डेटा इकट्ठा करने के लिए उपकरण:

जैक मैडेन ने बताया कि आगामी उपकरण जैसे अर्थ-बाउंड एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप वैज्ञानिकों को जलवायु पूर्वानुमानों की सूची का परीक्षण करने के लिए डेटा एकत्र करने की अनुमति देगा. चूंकि सतह के रंग और इस सतह पर पड़ने वाले प्रकाश के बीच एक महत्वपूर्ण अंतःक्रिया है इसलिए, किसी ग्रह की सतह के गुणों के आधार पर पाए जाने वाले प्रभाव जीवन की खोज में मदद करेंगे.

भारत समेत दस देशों का डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड के लिए हुआ चयन

भारत का चयन 19 मई 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कार्यकारी बोर्ड के लिए हो गया. इसके अतिरिक्त बोत्सवाना, कोलंबिया, घाना, गिनी बिसाऊ, मेडागास्कर, ओमान, कोरिया गणराज्य, रूस और यूके को भी कार्यकारी बोर्ड में जगह मिली है. कार्यकारी बोर्ड का मुख्य कार्य स्वास्थ्य सभा के निर्णयों और नीतियों को प्रभावी बनाना, इसे सलाह देना और इसके कार्य को सुविधाजनक बनाना है.

डब्ल्यूएचओ भारत समेत 100 देशों की मांग पर कोरोना वायरस को लेकर अपनी भूमिका की निष्पक्ष जांच को तैयार हो गया. इस बीच संगठन प्रमुख टेड्रॉस ए गेब्रेयसस ने सभी देशों से एजेंसी का वित्त पोषण जारी रखने का आग्रह भी किया. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी कोविड-19 महामारी पर डब्ल्यूएचओ की प्रतिक्रिया की जांच को तैयार हो गए. उन्होंने कहा कि चीन डब्ल्यूएचओ की अगुवाई में कोरोना महामारी में वैश्विक कार्रवाई की समीक्षा का समर्थन करता है.

चीन ने कोविड-19 से लड़ने के लिए डब्ल्यूएचओ को 151 अरब रुपये देने की घोषणा की

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने हाल ही में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए डब्ल्यूएचओ को अगले 2 साल में 151 अरब रुपये देने की घोषणा की है. राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि चीन में कोविड-19 की विकसित हो रही वैक्सीन जब भी उपलब्ध होगी, उसे वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि हमने ज़रूरतमंद देशों के सहयोग और मदद के लिए जो हो सका, किया है.

हर साल वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में ये देश मिलकर संयुक्त राष्ट्र की इस हेल्थ एजेंसी के काम की समीक्षा करते हैं और आने वाले साल के लिए उसकी प्राथमिकताएं तय करते हैं. इस बार इस महामारी पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की समीक्षा की जाएगी. डब्ल्यूएचओ ने जनवरी और फरवरी में चीन में वैज्ञानिकों की एक टीम भेजी भी थी.

कोल इंडिया का निजीकरण नहीं होगा: कोयला मंत्री

केंद्रीय कोयला मंत्री पहलाद जोशी ने कहा है कि सरकार कोल इंडिया का निजीकरण नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में कोल इंडिया के ज़रिए 1 अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य है और 50,000 करोड़ रुपये के निवेश से इसे हासिल करने में मदद मिलेगी. केंद्र सरकार ने 16 मई को कोयला क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी की घोषणा की थी.

केंद्र सरकार कोल इंडिया को मजबूत कर रही है और इसे आगे भी और मजबूत करेगी. उन्होंने कहा कि कंपनी के पास पर्याप्त कोयला भंडार है, जो देश में 100 वर्षों से अधिक तक बिजली बनाने के लिए पर्याप्त है. केंद्र सरकार को कोल इंडिया पर गर्व है और आने वाले समय में इसे और मजबूत किया जाएगा.

जानें क्यों मनाया जाता है विश्व उच्च रक्तचाप दिवस

प्रत्येक साल 17 मई को दुनियाभर में ‘विश्व उच्च रक्तचाप दिवस’ (World Hypertension Day) मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का उद्देशय उच्च रक्तचाप के बारे में जागरूकता फैलाना और लोगों को इस साइलेंट किलर को नियंत्रित करने के लिए प्रोत्साहित करना है. लोगों में हाइपरटेंशन के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए ये दिन मनाया जाता है. इस साल ‘विश्व उच्च रक्तचाप दिवस’ की थीम ‘अपना ब्लड प्रेशर नापें’ (Measure Your Blood Pressure) है.

उच्च रक्तचाप एक ऐसी बीमारी है जिसे रोका जा सकता है, लेकिन यह विश्वभर में मृत्यु की एक बड़ी वजह बना हुआ है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, साल 2017 में पूरे भारत में 22.5 मिलियन लोगों की जांच में पाया गया कि हर आठ में से एक भारतीय उच्च रक्तचाप का मरीज़ है.

राष्ट्रीय डेंगू दिवस 2020: जानें क्यों मनाया जाता है?

16 मई को हर साल स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा डेंगू दिवस मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य डेंगू के बारे में जागरूकता प्रसारित करना, निवारक कार्यवाही की पहल और रोग के संचारण वाले मौसम के समाप्त होने तक डेंगू को नियंत्रित करना है.

डेंगू होने पर व्यक्ति को तेज बुखार, शरीर में दर्द, आंखों में दर्द और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण हो सकते हैं. डेंगू दुनिया के कई हिस्सों में तेजी से उभरती हुई वायरल बीमारी है. डेंगू के वायरस का मुख्य वाहक एडीज़ एजिप्टी मच्छर (Aedes Aegypti Mosquito) होता है.