हिंसा की संस्कृति: वाशिंगटन प्रेस डिनर में गोलीबारी
अमेरिका में हथियारों के प्रसार ने राजनीतिक मतभेदों को बहुत घातक बना दिया है
यूं तो अमेरिका की राजनीति में लंबे समय से कटु राजनीतिक निष्ठा व्याप्त रही है, लेकिन बंदूकों के व्यापक प्रसार ने ही सार्वजनिक विमर्शों में मतभेदों को दरअसल घातक धार प्रदान की है। विडंबना यह है कि ट्रम्प प्रशासन अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन यानी हथियार रखने के अधिकार की रक्षा की कोशिशों में इस हद तक बढ़-चढ़कर आगे रहा है कि बंदूक रखने पर मुनासिब प्रतिबंधों को पलटने के मामले में उसका रवैया अक्सर नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए) के रूख के साथ मेल खाता है। मसलन, ट्रम्प ने 2000 में प्रहार करने वाले हथियारों पर प्रतिबंध का समर्थन किया था। फिर भी, उन्होंने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान, जिसे एनआरए द्वारा खर्च किए गए लाखों डॉलर का समर्थन हासिल था, की शुरुआत करते वक्त अपना नजरिया बदल लिया। अमेरिका में गाहे-बगाहे सामूहिक गोलीबारी की घटनाएं होती रही हैं। इनमें इस साल हुई तीन घटनाएं और ऐसी घटनाओं पर नजर रखने वाले डेटाबेस के मुताबिक पिछले 60 सालों में 500 से ज्यादा घटनाएं शामिल हैं। कैपिटल हिल पर एनआरए और उसके जैसे संगठनों के पास मौजूद अपार धन एवं लॉबिंग की शक्ति के प्रभाव के बावजूद, अमेरिका के लिए यह मुनासिब होगा कि वह बंदूक हिंसा की इस लगातार बढ़ती महामारी के कगार से एक कदम पीछे हटे और बंदूक से जुड़े व्यावहारिक सुधारों को सामने रखे, जिन्हें बाद में कांग्रेस द्वारा कानून के रूप में पारित किया जा सके। जब तक समाज और लोकप्रिय संस्कृति बंदूक से जुड़े कानूनों पर ज्यादा उदार रुख नहीं अपनाती, तब तक यही मानना सही रहेगा कि देश भर में नियमित रूप से देखी जाने वाली हिंसा बेलगाम जारी रहेगी।