GENERAL KNOWLEDGE

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एलआईसी ने लॉन्‍च की संशोधित प्रधानमंत्री वय वंदना योजना

भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (संशोधित-2020) को लॉन्च कर दिया है. एलआईसी ने एक बयान में कहा कि यह योजना 26 मई 2020 से तीन वित्तीय वर्ष अर्थात 31 मार्च 2023 तक बिक्री के लिए उपलब्ध होगी. इस योजना को एलआईसी इंडिया से ऑफलाइन या ऑनलाइन माध्यम से खरीदा जा सकता है.

केंद्रीय मंत्रीमंडल ने इस महीने की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री वय वदंन योजना का विस्तार किया है. मंत्रीमंडल ने योजना को तीन साल तक आगे बढ़ाने की घोषणा की थी. एलआईसी ने अपने बयान में कहा कि इस योजना में पॉलिसी की अवधि 10 साल की होती है.

मारुति ने ICICI Bank से मिलाया हाथ

कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने हाल ही में कहा कि उसने अपने ग्राहकों को बेहतर कर्ज सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आईसीआईसीआई बैंक के साथ गठजोड़ किया है. इसके तहत कार खरीदने वालों को मासिक किस्त के मामले में कुछ राहत दी जाएगी.

वाहन कंपनी ने एक बयान में कहा कि गठजोड़ के साथ आईसीआईसीआई बैंक लचीली ईएमआई (समान मासिक किस्त) योजना की पेशकश कर रहा है. इसके तहत ग्राहकों को शुरू में कम किस्त देने की सुविधा मिलेगी ताकि उन्हें कोरोना (कोविड-19) महामारी के कारण नकदी समस्या से पार पाने में मदद मिले.

राजस्थान में चौथा टाइगर रिजर्व बनेगा

राजस्थान में चौथा नया टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर कसरत तेज हो गई है. यह टाइगर रिजर्व बूंदी जिले में रामगढ़, हिंडोली, डाबी व कालंदा के जंगलों में बनाया जाएगा. नया रिजर्व 1 लाख 17 हजार 104 हैक्टेयर का बनेगा. नये टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है. आगामी विधानसभा सत्र में इसे मंजूरी मिलेगी और फिर केंद्रीय बाघ प्राधिकरण (एनटीसीए) में अनुमति के लिए भेजा जाएगा. राजस्थान के वनमंत्री सुखराम विश्नोई का कहना है कि चौथा टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर काम चल रहा है.

नासा ने WFIRST हबल टेलीस्कोप का नाम बदलकर खगोल विज्ञानी नैन्सी ग्रेस रोमन रखा

नैन्सी ग्रेस रोमन को हबल स्पेस टेलीस्कोप की जननी के तौर पर जाना जाता है, जिसे 30 साल पहले लॉन्च किया गया था.

नासा ने अंतरिक्ष एजेंसी की पहली प्रमुख खगोल विज्ञानी नैन्सी ग्रेस रोमन के नाम पर अपनी अगली पीढ़ी के स्पेस टेलीस्कोप – वाइड-फील्ड इन्फ्रारेड सर्वे टेलीस्कोप (WFIRST) का नाम बदल दिया है. नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप या रोमन स्पेस टेलीस्कोप वर्ष 2025 में लॉन्च किया जा सकता है. 

नासा की पहली प्रमुख खगोल विज्ञानी नैन्सी ग्रेस रोमन ने व्यापक ब्रह्मांड में खोज करने के लिए अंतरिक्ष दूरबीनों का मार्ग प्रशस्त किया था. उन्हें हबल स्पेस टेलीस्कोप की माता अर्थात जननी के तौर पर भी जाना  जाता है, जिसे 30 साल पहले लॉन्च किया गया था.

नासा के प्रशासक जिम ब्रिडेनस्टाइन ने कहा कि यह नैन्सी ग्रेस रोमन के नेतृत्व और दृष्टि के कारण ही संभव हो सका कि नासा एस्ट्रोफिजिक्स (खगोल भौतिकी) में अग्रणी बन गया और दुनिया की सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष दूरबीन हबल को लॉन्च किया. उन्होंने कहा कि वह WFIRST के लिए किसी अन्य बेहतर नाम के बारे में नहीं सोच सकते हैं, जोकि हबल और वेब स्पेस टेलीस्कोप का स्थान लेगा.

रोमन स्पेस टेलीस्कोप: उद्देश्य

रोमन स्पेस टेलीस्कोप से ऐसी उम्मीद की जाती है कि नासा द्वारा अंतरिक्ष की बेहतर समझ हासिल करने और लंबे समय से कायम खगोलीय रहस्यों जैसेकि – जैसेकि ब्रह्मांड के विस्तार के पीछे काम करने वाले बल को उजागर करने और हमारे सौर मंडल से परे के दूरस्थ ग्रहों की खोज को बढ़ावा देने में अंतरिक्ष एजेंसी की मदद करेगा. 

कौन थी नैन्सी ग्रेस रोमन?

• नैन्सी ग्रेस रोमन का जन्म 16 मई, 1925 को नैशविले, टेनेसी में हुआ था. रोमन तब से खगोल विज्ञानी बनना चाहती थीं जब वे सातवीं कक्षा में थीं.

• हालांकि, उन्हें ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जो उनकी पीढ़ी की कई महिलाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान में आगे बढ़ने में दिलचस्पी दिखाने पर झेलनी पड़ती थीं. विज्ञान की दिशा में आगे बढ़ने से हतोत्साहित होने के बावजूद, रोमन ने 1946 में खगोल विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1949 में शिकागो विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की.

• रोमन ने जल्दी ही अमेरिकी नौसेना अनुसंधान प्रयोगशाला में एक पद ग्रहण किया और रेडियो तरंगों के माध्यम से ब्रह्मांडीय प्रश्नों पर शोध करने के लिए अथक प्रयास किया.

• एजेंसी की स्थापना के छह महीने बाद 1959 में रोमन नासा में शामिल हो गईं. उन्होंने नासा के अंतरिक्ष विज्ञान कार्यालय में खगोल विज्ञान और सापेक्षता के प्रमुख के रूप में कार्य किया. वे खगोल विज्ञान से संबंधित कार्यक्रमों और अनुदान के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार थीं.

• अपनी तेज पेशेवर प्रगति के बावजूद, रोमन ने लैंगिक असमानता का सामना किया, क्योंकि यह उन महिलाओं के लिए एक कठिन युग था जो वैज्ञानिक अनुसंधान में आगे बढ़ना चाहती थीं.

• उन्होंने ब्रह्मांड के रहस्यों की जांच करने के लिए नए तरीके स्थापित करने के लिए अपनी दृष्टिकोण के मुताबिक खोज जारी रखी.

• रोमन के नेतृत्व में नासा ने वर्ष 1966 और वर्ष 1972 के बीच चार ऑर्बिटिंग एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्ज़र्वेटरीज़ लॉन्च कीं. चार में से केवल दो ही सफल रहे और उन्होंने अंतरिक्ष-आधारित एस्ट्रोफिजिक्स  के महत्त्व का खुलासा किया और हबल के लिए पूर्ववर्ती के तौर पर काम करने का प्रतिनिधित्व किया.

• हबल स्पेस टेलीस्कोप को एक वास्तविकता बनाने का श्रेय नैन्सी ग्रेस रोमन को जाता है. टेलीस्कोप, जिसे गहन जांच के बाद लॉन्च किया गया था, अब तक की सबसे क्रांतिकारी अंतरिक्ष दूरबीनों में से एक बन गया. 

• रोमन को टेलिस्कोप की माता कहा गया है, क्योंकि उन्होंने नए उपकरणों के पक्ष में अथक रूप से अपनी बात रखी जिससे वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष से व्यापक ब्रह्मांड का अध्ययन करने की सुविधा मिली.

• वर्ष 2018 में रोमन का निधन हो गया और उन्होंने एक जबरदस्त वैज्ञानिक विरासत अपने पीछे छोड़ी. वर्तमान में हबल स्पेस टेलीस्कोप दुनिया का सबसे शक्तिशाली और उत्पादक स्पेस टेलीस्कोप है. 

डेब्यू वनडे में हैट्रिक विकेट लेने वाले श्रीलंकाई तेज गेंदबाज को बोर्ड ने किया निलंबित

श्रीलंका के तेज गेंदबाज शेहान मदुशनका को ड्रग्स रखने के आरोप में हिरासत में लिया गया है. युवा तेज गेंदबाज को हिरासत में लिया गया था और अब उन्हें मजिस्ट्रेट ने दो सप्ताह के लिए हिरासत में भेज दिया है. वहीं, श्रीलंका बोर्ड ने भी एक्शन लेते हुए शेहान मदुशनका को क्रिकेट के हर एक फॉर्मेट से बैन करने का फैसला कर लिया है.

श्रीलंका की तरफ से साल 2018 में मदुशनका को अपना पहला वनडे मैच खेलने का मौका मिला था. अपने डेब्यू वनडे इंटरनेशनल मैच को यादगार बनाते हुए मदुशनका ने हैट्रिक लेकर इसे यादगार बनाया था. श्रीलंकाई तेज गेंदबाज को घरेलू क्रिकेट का ज्यादा अनुभव नहीं होने के बाद भी इंटरनेशनल डेब्यू करने का मौका मिला था.

मेजर सुमन गवनी यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड से सम्मानित होने वाली पहली भारतीय

भारतीय सेना की मेजर सुमन गवनी यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड से सम्मानित होने वाली पहली भारतीय हैं. वे साल 2018 से दक्षिण सूडान में यूएन पीसकीपर के तौर पर कार्यरत हैं. आर्मी सिग्नल कॉर्प्स के साथ काम करने वाली मेजर गवनी साल 2011 में सेना में शामिल हुईं थीं और उनके पास टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की डिग्री है.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस ने दोनों अधिकारियों को प्रभावशाली आदर्श बताते हुए कहा कि अपने काम के माध्यम से वे नये विचारों को समाहित करती हैं और समुदायों में विश्वास जगाती हैं. सैन्य पर्यवेक्षक सुमन गवनी यूएन मिशन के तहत दक्षिण सूडान में तैनात थी और हाल में ही अपना मिशन पूरा किया.

भारत का क्रूड इस्पात उत्पादन 65 प्रतिशत गिरकर 31.3 लाख टन रहा

भारत का कच्चा इस्पात उत्पादन अप्रैल महीने में 65 प्रतिशत से अधिक घटकर 31.3 लाख टन पर आ गया. विश्व इस्पात संघ ने इसकी जानकारी दी है. कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिये देश भर में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है.

विश्व इस्पात संघ (वर्ल्डस्टील) ने एक रिपोर्ट में कहा कि एक साल पहले इसी महीने (अप्रैल 2019) के दौरान देश में 90.2 लाख टन कच्चे इस्पात का उत्पादन हुआ था. इससे पहले मार्च 2020 में कच्चा इस्पात उत्पादन मार्च 2019 के 100.4 लाख टन की तुलना में 14 प्रतिशत कम होकर 86.5 लाख टन रहा था. अप्रैल महीने के दौरान वैश्विक स्तर पर इस्पात के उत्पादन में 13 प्रतिशत की गिरावट रही.

अमेरिका कोरोना वायरस से निपटने के लिए पाकिस्तान को देगा 60 लाख डॉलर

अमेरिका ने कहा कि वह कोरोना वायरस वैश्विक महामारी से निपटने के पाकिस्तान के प्रयासों में मदद हेतु उसे 60 लाख डॉलर देगा. पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत पॉल जोन्स ने हाल ही में एक वीडियो संदेश में कहा कि यह धनराशि पाकिस्तान को उन ‘‘ स्वास्थ्यकर्मियों को और प्रशिक्षण देने में काम आएगी जो अस्पतालों में कोरोना वायरस संक्रमण के गंभीर हालत वाले मरीजों की देखभाल करते हैं, इससे चिकित्सा केन्द्रों में कोरोना वायरस फैलने से रुकेगा.

इसके अलावा इससे संक्रमित इलाकों में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की जांच के लिए मोबाइल प्रयोगशाला भी बनाई जाएगी.

चीन ने मानवरहित हेलीकॉप्टर का परीक्षण किया

चीन ने हाल ही में अपने पहले मानवरहित ड्रोन हेलीकॉप्टर का परीक्षण किया है. इसे भारत-तिब्बत सीमा पर तैनात किया जा सकता है. एआर 500-सी नाम के इस ड्रोन हेलीकॉप्टर को एविएशन इंडस्ट्री कारपोरेशन आफ चाइना (एवीआइसी) ने विकसित किया है.

यह ड्रोन हेलीकॉप्टर देश के दक्षिण-पश्चिम इलाके भारत-तिब्बत सीमा पर निगरानी के के लिए तैनात किया जा सकता है. यह पांच हजार मीटर की उंचाई से उड़ान भरकर 6700 मीटर तक की उंचाई पर जा सकता है. 500 किलोग्राम वजन के साथ यह 170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार पांच घंटे तक उड़ान भर सकता है.